वाह रे हिंदूस्तान, इंदिरा कांग्रेस की तो पटेल भाजपा के हो गये
बैंगलोर। चंद रोज पहले किसी महानुभाव ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा था कि .. वाह रे हिंदुस्तान.. नारियल हिंदू तो खजूर मुसलमान हो गये.. जिसे पढकर चेहरे पर एक हंसी और दिमाग पर बहुत सारे विचार कौंध गये थे। लेकिन आज जब मोदी ने सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंति पर पूरे देश को एकता की माला में रमने की कोशिश की और इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरने की कोशिश की तो अनायस ही मुझे नारियल और खजूर याद आ गये हैं।
ठीक है पिछले कई सालों से हमारा देश आज के दिन पटेल से ज्यादा इंदिरा जी को याद करता आया है लेकिन क्या आपको नहीं लगता है कि देश की सत्ता पर राज करने वाली सरकारों ने हमारे देश के रीयल नेताओं को भी अपने-अपने हिसाब से बांट दिया है। सरदार पटेल उस शक्स का नाम है जिन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण रोल निभाते हुए देश को गृहमंत्री के रूप में एक नयी दिशा दी थी। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं कि पटेल एक जीनयस लीडर थे।
रही बात इंदिरा गांधी कि तो भले ही देश की पीएम बनने के बाद उनकी ओर से कुछ ऐसे कदम उठाये गये जिन्होंने उन्हें एक डिप्लोमेटिक लीडर की संज्ञा दे दी लेकिन इसमें किसी को कोई शक नहीं कि पीएम बनने से पहले उनका रोम-रोम देश के लिए ही था। वो अपने आप में ही एक बहुमुखी प्रतिभासंपन्न व्यक्तित्व की मालकिन थी जिन्होंने पूरूष प्रधान समाज और देश में अपनी एक अलग पहचान बनायी थी। इंदिरा जी ने भी देश के संघर्ष को करीब से समझा और जाना था तभी तो वो आज बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इंदिरा गांधी कांग्रेस पार्टी की ही सगी थी और पटेल पर केवल बीजेपी का ही हक है। आज से पहले मीडिया चैनलों और अखबारों में भी पटेल को इतनी तवज्जो नहीं मिली जितनी की आज मिल रही है तो क्या इसके पीछे कारण हमारे देश की सरकार है जिसने पटेल के आगे इंदिरा गांधी को पीछे कर दिया है और सरकार के इस कदम के चलते ही आज लोगों को पटेल की खासियत नजर आ रही है जो कि पिछले कई सालों से कहीं गुम है।
अब आप जवाब दीजिये कि क्या वाकई में इंदिरा कांग्रेस की तो पटेल भाजपा के हैं। आपनी बात आप नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में भी लिख सकते हैं।













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