लोकसभा चुनावों से पहले क्या सुधरेंगे भारत-पाकिस्तान के रिश्ते और आएगा नया मोड़?
नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों में अब कुछ माह का समय बचा है और इन चुनावों से पहले भारत-पाकिस्तान के रिश्तों से जुड़ी कोई अहम खबर देशवासियों को मिल सकती है। यह ऐसा पल है जब दक्षिण एशिया में काफी हलचल मची हुई है। भारत और पाकिस्तान में पिछले करीब चार वर्षों से बातचीत बंद है। सूत्रों की मानें तो चुनावों से पहले भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बेहतर होंगे, इस बात की संभावना काफी कम है। वहीं इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया गया है कि दोनों देशों के संबंध को लेकर कोई सकारात्मक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

इमरान ने दोहराई है बेहतर संबंधों की बात
पिछले माह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर करने की अपनी मांग दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि वह इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब नई दिल्ली की ओर से प्रतिक्रिया मिलती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि भारत के साथ वार्ता की संभावना आम चुनावों से पहले नजर नहीं आती है। अप्रैल और मई में देश में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। वहीं सरकार से जुड़े सूत्रों ने इस बात से भी इनकार कर दिया है कि इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को परेशान करने वाली बात को भारत काफी हल्के में ले रहा है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने अभी तक इस मसले पर कोई एक्शन नहीं लिया है और नई रिहायशी बिल्डिंग्स में गैस कनेक्शन की मंजूरी नहीं दी गई है। जबकि कई बार भारत की ओर से इस बाबत अनुरोध किया जा चुका है।

अधिकारियों के उत्पीड़न पर पाक को जैसे को तैसा
सरकारी सूत्रों की मानें तो कई ऐसी घटनाएं हैं जहां पर भारतीय अधिकारियों को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है। पिछले 10 वर्षों से तो इस्लामाबाद में हाई कमीशन के कई प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं। लोग हाई कमीशन की बिल्डिंग्स में रह रहे हैं लेकिन उनके पास गैस सप्लाई ही नहीं है। सिर्फ इतना ही नहीं पाकिस्तान की तरफ से टेलीकॉम कनेक्शंस भी नहीं दिए गए हैं। साथ ही नई बिल्डिंग्स के लिए फर्नीचर्स को भी बॉर्डर पर रोक दिया गया है। अधिकारियों के साथ होने वाले गलत बर्ताव के बारे में भी बात की गई है। सरकार से जुड़े सूत्रों की मानें तो भारत ने भी इस पर 'जैसे को तैसा' की तरह ही जवाब दिया है। इसका नतीजा है कि अब पाकिस्तान में अधिकारी झुकने लगे हैं।

करतारपुर कॉरीडोर बातचीत का रास्ता नहीं
पिछले दिनों भारत और पाक के बीच करतारपुर कॉरीडोर का उद्घाटन हुआ है। सरकार की मानें तो यह एक सांस्कृतिक पहल थी और इसे डिप्लोमैटिक या फिर राजनीतिक पहल नहीं माना जाना चाहिए। सरकार के करीबियों के मुताबिक करतारपुर कॉरीडोर को खेलने का मतलब यह नहीं है कि भारत, पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता खोलना चाहता है। करतारपुर कॉरीडोर पाकिस्तान के करतारपुर में स्थित दरबार साहिब को भारत के पंजाब राज्य में स्थित गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक श्राइन से जोड़ेगा।












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