सरकार ने वापस लिया कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए नारंगी पासपोर्ट का लाने का प्रस्ताव
सरकार ने वापस लिया कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए नारंगी पासपोर्ट का जारी करने का प्रस्ताव
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नारंगी (ऑरेंज) रंग का पासपोर्ट जारी करने का फैसला वापस ले लिया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह वर्तमान में चल रही प्रक्रिया के अनुसार ही पासपोर्ट का आखिरी पेज प्रिंट करेगा और ईसीआर (इमिग्रेशन क्लियरेंस रिक्वायर्ड) पासपोर्ट होल्डर्स के लिए अलग पासपोर्ट नहीं बनाया जाएगा। ईसीआर कैटेगिरी ऐसे आवेदकों के लिए लाई गई थी जो 18 देशों में काम के लिए जाते हैं इनमें से ज्यादातर खाड़ी देश हैं। उन्हें भारत छोड़ने से पहले प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स के ऑफिस से इमिग्रेशन क्लियरेंस सर्टिफिकेट लेना होता है।

विदेश मंत्रालय जनवरी के पहले हफ्ते में एक प्रस्ताव लेकर आया था, जिसके मुताबिक नारंगी (ऑरेंज) रंग का पासपोर्ट ऐसे लोगों के लिए जारी किया जाता जो 10वीं से कम पढ़े लिखे हैं और नौकरी के लिए विदेश जाना चाहते हैं। सरकार का कहना था कि इससे खाड़ी देशों में जाने वाले कम पढ़े लिखे लोगों को मदद मिलेगी। इस प्रस्ताव का विपक्षी दल विरोध कर रहे थे। 29 जनवरी की समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने फैसला किया है कि वो पासपोर्ट की पुरानी व्यवस्था को जारी रखेगी।
विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने नारंगी पासपोर्ट के प्रस्ताव का ये कहते हुए विरोध कर रहे थे। विपक्ष का कहना था कि इस तरह की व्यवस्था से कम पढ़े लिखे लोग अपने आपको दोयम नागरिक महसूस करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार्य बताते हुए ट्वीट किया था,'भारत के माइग्रेंट मजदूरों को दोयम दर्जे के नागरिक के तौर पर ट्रीट करना स्वीकार्य नहीं है.' केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी इस योजना को लेकर कहा था, 'यह फैसला आम मजदूरों और पढ़े लिखे मजदूरों में अंतर पैदा करेगा. यह एक ऐसी स्थिति पैदा करेगा जिसमें 10वीं पास नहीं करने वाले मजदूरों के सेकंड क्लास सिटिजन समझा जाएगा।'












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