2025 से भारत में भी ट्रक ड्राइवरों के अच्छे दिन आएंगे, एसी केबिन होगा अनिवार्य, बाजार पर भी दिखने लगा असर
2025 से भारत में सभी ट्रकों के केबिन में एयरकंडीशन सिस्टम अनिवार्य होगा। एक ट्रक ड्राइवर जो रोजाना 11 से 12 घंटे ट्रक चलाते हैं, उनके लिए इससे सुकून भरी खबर क्या हो सकती है। मुश्किल हालातों में ट्रक ड्राइवरों की लंबी ड्यूटी को अक्सर सड़क हादसों का प्रमुख कारण बताया जाता है।
वैसे वॉल्वो और Scania जैसी वैश्विक ट्रक कंपनियां पहले से ही अपने ट्रकों में ड्राइवरों के लिए एयरकंडीशन केबिन देती हैं। लेकिन, यह ट्रक बहुत ही महंगे हैं, इसलिए भारत की ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए यह पॉकेट से बाहर के वाहन हैं।

ट्रक ड्राइवरों के केबिन में एसी की सुविधा अनिवार्य
भारत में ट्रक ड्राइवरों की ड्यूटी आरामदायक बनाने के लिए कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। लेकिन, अभी तक भारत में ट्रक बनाने वाली स्वदेशी कंपनियों ने इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया है। बल्कि, टालमटोल वाला रवैया ही अपनाया है। सोमवार को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया है कि उन्होंने ट्रकों के केबिन में एसी की अनिवार्यता के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
ट्रक निर्माता कंपनियों को मिला 18 महीने का वक्त
गडकरी के मुताबिक ट्रक बनाने वाली कंपनियों को वाहनों के केबिन को अपग्रेड करने के लिए 18 महीने ट्रांजिशन के लिए मिल रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारे देश में कुछ ड्राइवर 12 से 14 घंटे वाहन चलाते हैं, जबकि दूसरे देशों में बस और ट्रक ड्राइवरों की ड्यूटी के लिए घंटों की संख्या पर पाबंदियां हैं। '
43 से 47 डिग्री तापमान में वाहन चलाते हैं ट्रक ड्राइवर- गडकरी
उन्होंने कहा, 'हमारे ड्राइवर 43 से 47 डिग्री तापमान में वाहन चलाते हैं और हमें ड्राइवरों की स्थिति के बारे में सोचना ही होगा। मैं मंत्री बनने के बाद से ही एसी केबिन को लागू करने के लिए इच्छुक था। लेकिन कुछ लोगों ने इसका विरोध किया कि इससे लागत बढ़ जाएगी। आज (सोमवार को) मैंने फाइल पर साइन कर दिया है कि सभी ट्रक में केबिन एसी केबिन होगा।'
ट्रक बनाने वाली कंपनियां कर रही थीं विरोध
केंद्रीय मंत्री ने यह घोषणा एक ऑटोमोबाइल कंपनी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में की। भूतल परिवहन मंत्रालय ने पहली बार इस तरह का प्रस्ताव 2016 में ही दिया था। मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, 'इंडस्ट्री की मांग थी कि यह सुविधा वैकल्पिक होनी चाहिए। कुछ ने तो यहां तक दावा किया था कि एसी केबिन में ड्राइवरों को नींद आ सकती है।'
'बस ड्राइवरों के बारे में भी यही धारणा थी'
उन्होंने बताया कि 'बस ड्राइवरों के बारे में भी हमारी हमेशा से एक ही धारणा थी और ड्राइवरों के केबिन सालों तक नॉन-एसी रहे। लेकिन, वॉल्वो बसें आने के बाद यह धारणा खत्म हो गई और अब सभी लग्जरी बसों में ड्राइवरों के लिए भी एसी केबिन होते हैं।'
10 से 20 हजरा रुपए की लागत बढ़ने का अनुमान
एक अनुमान के अनुसार ट्रकों में एसी केबिन लगाने से लागत में प्रति ट्रक 10,000 रुपए से 20,000 रुपए की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर यह अनुमान सही है तो ट्रक ड्राइवरों की चुनौती भरी ड्यूटी के मुकाबले कुछ भी नहीं है।
ऑटोमोटिव एसी बनाने वाले कंपनी के शेयर में भारी उछाल
हालांकि, परिवहन मंत्रालय ने अभी ट्रक बनाने वाली कंपनियों को करीब डेढ़ साल की मोहलत दी है। लेकिन, सरकार के फैसले का बाजार पर रुझान दिखने लगा है। मंगलवार को ऑटोमोटिव एयर-कंडीशनर बनाने वाले कंपनी Subros के शेयर इतनी तेजी से ऊपर भागे कि 20 फीसदी के अपर सर्किट पर लॉक हो गए। देश में Subros ऑटो एयर कंडीशनिंग सिस्टम बनाने वाली प्रमुख कंपनी है। अभी इस कंपनी के पास सालाना 15 लाख एसी किट बनाने की क्षमता है।












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