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Goa Liberation Day 2024: 451 वर्ष तक चले शासन का 40 घंटे में अंत! जानें कैसे गोवा को भारत ने दिलाई मुक्ति?

Goa Liberation Day 2024: 1961 में भारत ने गोवा, दमन और दीव को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराकर अपनी स्वतंत्रता को और मजबूत किया। 451 वर्ष तक चले औपनिवेशिक शासन का अंत केवल 40 घंटे के सैन्य अभियान 'ऑपरेशन विजय' से हुआ। यह कार्रवाई भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की एकता और रणनीतिक क्षमता का परिचायक थी।

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुर्तगाली 1510 में गोवा पहुंचे, जिससे यह व्यापार, प्रशासन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। औपनिवेशिक शासन में दमनकारी नीतियों की भी विशेषता थी, जिसमें धार्मिक धर्मांतरण, असहमति का दमन और बुनियादी अधिकारों से वंचित करना शामिल था, जिसने मुक्ति की इच्छा को बढ़ावा दिया। कैसे हुआ गोवा पर पुर्तगाली शासन का पतन? आइए जानें...

Goa Liberation Day 2024

गोवा पर पुर्तगाली शासन का इतिहास (Goa Portuguese Rule History)

  • 1510 में अफोंसो डी अल्बुकर्क के नेतृत्व में पुर्तगालियों ने गोवा पर कब्जा किया।

  • भारत की स्वतंत्रता (1947) के बाद भी गोवा, दमन और दीव पुर्तगाल के नियंत्रण में रहे।
  • 1949 में भारत ने गोवा को शांतिपूर्ण तरीके से आजाद करने की कोशिश की, लेकिन पुर्तगाल ने इनकार कर दिया।
  • 1954 में पुर्तगाल ने घोषणा की कि गोवा के लोग भारत के साथ शामिल होने की कोई इच्छा व्यक्त नहीं कर सकते।
  • मुक्ति का कारण और सैन्य कार्रवाई की शुरुआत

    • तनाव बढ़ना: नवंबर 1961 में पुर्तगाली सैनिकों ने भारतीय जहाजों पर गोलीबारी की, जिसमें अंजादीप द्वीप पर एक व्यापारी जहाज साबरमती पर हमला भी शामिल था।

    • ऑपरेशन विजय: 17 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया। इस अभियान में ज़मीनी, समुद्री और हवाई हमले शामिल थे।
    • पुर्तगाली आत्मसमर्पण: 19 दिसंबर 1961 को गोवा के पुर्तगाली गवर्नर मैनुअल एंटोनियो वासालो ई सिल्वा ने आत्मसमर्पण कर दिया, और गोवा, दमन और दीव भारत का हिस्सा बन गए।
    • सैन्य अभियान की प्रमुख घटनाएं जानें...
      भूमि पर कार्रवाई:

      • भारतीय सेना ने तेज़ी से गोवा में प्रवेश किया।
      • अंजादीप द्वीप पर हमला किया गया, जहां भारतीय नौसेना ने दुश्मन के प्रतिरोध को कुचल दिया।

      नौसेना की भूमिका:

      • नौसेना ने तट पर सुदृढ़ीकरण को रोका।
      • INS त्रिशूल (INS Trishul-नौसेना का युद्धपोत ) और INS मैसूर (भारतीय नौसेना निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आईएनएस मैसूर) ने पुर्तगाली ठिकानों पर हमला किया।

      वायुसेना का योगदान:

      • हवाई टोही और जमीनी बलों को समर्थन दिया।

      मुक्ति का ऐतिहासिक महत्व क्या? (Goa Liberation Significance)

      • राष्ट्रीय एकता का प्रतीक: गोवा की मुक्ति ने भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया।

      • पश्चिमी पाखंड का पर्दाफाश: पश्चिमी देशों ने भारत की कार्रवाई की आलोचना की, लेकिन पुर्तगाल के औपनिवेशिक दमन को नज़रअंदाज किया।
      • संयुक्त राष्ट्र में समर्थन: यूएसएसआर, श्रीलंका, और लाइबेरिया जैसे देशों ने भारत का समर्थन किया।
      • दुनिया का कैसा रूख?

        • पश्चिमी आलोचना: अमेरिका, ब्रिटेन, और फ्रांस ने भारत से गोवा से अपनी सेना हटाने की मांग की।

        • भारत का जवाब: उस वक्त रहे भारत के प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि पश्चिमी देशों ने कभी भी पुर्तगाल से शांतिपूर्ण समाधान के लिए दबाव नहीं बनाया।
        • अभियान की उपलब्धियां और सम्मान
          भारत का तिरंगा फहराया गया: 19 दिसंबर को गोवा, दमन और दीव में भारतीय तिरंगा लहराया गया।
          सम्मान:

          • लेफ्टिनेंट केलमन को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
          • लेफ्टिनेंट अरुण ऑडिटो को नौसेना पदक मिला।
          • चीफ पेटी ऑफिसर अली मोहम्मद को शौर्य चक्र से नवाजा गया।

          गोवा की मुक्ति न केवल भारत की सैन्य और कूटनीतिक जीत थी, बल्कि यह उपनिवेशवाद के खिलाफ वैश्विक संघर्ष का भी प्रतीक बनी। ऑपरेशन विजय ने दिखाया कि जब देश की एकता और स्वतंत्रता का सवाल हो, तो भारत दृढ़ता और साहस के साथ खड़ा रहता है।

          ये भी पढ़ें- गोवा CM की पत्नी का AAP नेता संजय सिंह पर 100 करोड़ की मानहानि का दावा, पार्टी चुनाव से ध्यान भटकाने का आरोप

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