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Ganesh Uike: कौन था कांग्रेसियों की लाशें बिछाने वाला गणेश उइके? 4 दशक के बाद कैसे ढहा आतंक का किला?

Odisha Maoists Ganesh Uike: भारत को 'नक्सल मुक्त' बनाने की दिशा में सुरक्षाबलों ने आज एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। जब पूरा देश क्रिसमस का जश्न मना रहा था, तब ओडिशा के जंगलों में सुरक्षाबलों ने माओवादियों के सबसे बड़े किलों में से एक को ध्वस्त कर दिया। इस मुठभेड़ में 1.1 करोड़ रुपये का इनामी और सेंट्रल कमेटी का सदस्य गणेश उइके मारा गया है।

यह मुठभेड़ ओडिशा के कंधमाल और गंजम जिलों की सीमा पर स्थित राम्पा के घने जंगलों में हुई। खुफिया जानकारी मिली थी कि माओवादी किसी बड़ी साजिश के लिए मीटिंग कर रहे हैं। इसके बाद SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप), CRPF और BSF ने एक साझा घेराबंदी शुरू की।

Ganesh Uike Maoists Odisha

जैसे ही सुरक्षाबल ठिकाने के करीब पहुंचे, माओवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने गणेश उइके सहित कुल 4 माओवादियों को ढेर कर दिया, जिनमें दो महिला कैडर भी शामिल हैं।

कौन था गणेश उइके? क्यों था इतना खतरनाक?

69 वर्षीय गणेश उइके माओवादी संगठन का कोई साधारण सदस्य नहीं, बल्कि एक 'मास्टरमाइंड' था। उसकी अहमियत इन बिंदुओं से समझी जा सकती है:

  • 7 राज्यों में तलाश: उइके के खिलाफ ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र समेत 7 राज्यों में गंभीर मामले दर्ज थे।
  • रणनीतिक प्रमुख: वह साउथ सब जोनल का इंचार्ज था और ओडिशा में माओवादी गतिविधियों का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था।
  • करोड़ों का इनाम: उस पर 1.1 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम था, जो उसकी दहशत और रसूख को दर्शाता है।

कांग्रेस के काफिले पर उइके ने किया था बड़ा हमला

69 साल के गणेश उइके करीब 40 साल से अंडरग्राउंड था। सुरक्षा बलों ने उइके को तीन माओवादियों के साथ ओडिशा के कंधामल जिले में मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, उइके कई बड़े माओवादी हमलों में शामिल रहा था।

साल 2013 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की झीरम घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस नेताओं और पदाधिकारियों के काफिले पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में करीब 27 लोगों की मौत हुई थी। इसी घटना के बाद गणेश उइके सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वॉन्टेड सूची में शामिल हो गया था।

मौके से आधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद

मुठभेड़ के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई, तो सुरक्षाबलों को भारी मात्रा में युद्ध सामग्री मिली:

  • दो INSAS राइफलें
  • एक .303 राइफल
  • भारी मात्रा में कारतूस और दैनिक उपयोग का सामान।

DIG (नक्सल ऑपरेशन) अखिलेश्वर सिंह के अनुसार, "यह ऑपरेशन पुख्ता इंटेलिजेंस पर आधारित था। गणेश उइके का खात्मा ओडिशा में माओवादी नेटवर्क के लिए 'ताबूत की आखिरी कील' साबित हो सकता है।"

माओवाद के अंत की शुरुआत?

केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक भारत से वामपंथी उग्रवाद (LWE) को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ और ओडिशा में हुई बड़ी मुठभेड़ें इसी रणनीति का हिस्सा हैं। गणेश उइके जैसे टॉप लीडर का मारा जाना संगठन के मनोबल को पूरी तरह तोड़ देगा।

अभी क्या है स्थिति?

घटनास्थल पर अभी भी सर्च और कंबिंग ऑपरेशन जारी है। पुलिस को अंदेशा है कि जंगल में कुछ और नक्सली छिपे हो सकते हैं। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को हाई-अलर्ट पर रखा है।

ये भी पढ़ें: Andhra Pradesh: खूंखार माओवादी हिडमा के बाद एक और टॉप लीडर ढेर, दूसरे दिन मुठभेड़ में 7 नक्सलियों की मौत

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