Gaganyaan Mission: गगनयान की समुद्र में लैंडिग के बाद कैसे होगी रिकवरी? इसरो ने नेवी के संग मिल कर की टेस्टिंग
Gaganyaan Mission: गगनयान की समुद्र में लैंडिग के बाद कैसे होगी रिकवरी? इसरो ने नेवी के संग मिल कर की टेस्टिंग

इंसान को अंतरिक्ष में भेजने का भारत का सपना गगनयान मिशन एक कदम और बढ़ चुका है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और भारतीय नौसेना गगनयान मिशन को आगे बढ़ाने क्योंकि भारत अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। भारतीय नौसेना के साथ इसरो ने गगनयान के क्रू मॉड्यूल का रिकवरी परीक्षण किया। गगनयान के लैंडिंग के बाद उसे समुद्र में रिकवर करने के लिए कोच्चि में नेवी और इसरो ने सर्वाइल टेस्ट फैसिलिटी में ये परीक्षण किया।

जानें क्यों बेहद जरूरी है ये परीक्षण
बता दें गगनयान अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करने के बाद समुद्र में गिर जाएगा उसके बाद उसे रिकवर कैसे किया जाएगा ये परीक्षण इसके लिए किया गया था। इसरो और नेवी ने इस परीक्षण को करने के लिए क्रू मॉड्यूल को तेज लहरों के तैरने के लिए छोड़ दिया। जिससे ये पता लगाया जा सके कि उसके तैरने की क्षमता क्या है?

गगनयान की लैंडिग के बाद रिकवरी की जाएगी
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी को उम्मीद है कि परीक्षण से चालक दल की रिकवरी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। क्रू मॉड्यूल रिकवरी मॉडल के परीक्षण के दौरान उसका वजन, सेंटर ऑफ ग्रैविटी के अलावा बाहरे ढाचे की जांच की गई। इस परीक्षण में जांच बिल्कुल उस तरह से की जा रही है जैसे गगनयान की लैंडिग और उसके बाद रिकवरी की जाएगी।

गगनयान को तेज लहरों में छोड़ दिया
याद रहे ह्यूगन स्पेसफ्लाइस की आखिरी चरण क्रू मॉड्यूल की रिकवरी होती है। जिसका परीक्षण पहले से किया जा रहा है। इसरो और नेवी ने गगनयान की वापसी पर उसकी रिकवरी के लिए जो परीक्षण किया उसके लिए गगनयान को तेज लहरों में छोड़ दिया और उसमें बुवॉय और अप राइटिंग फ्लोट्स के साथ पानी में डालकर कर परीक्षण किया। जिससे ये पता किया जा सके कि समुद्र की तेज लहरों में कौन सा तरीका अधिक सुरक्षित रहेगा।

भारतीय नौसेना की इस अत्याधुनिक सुविधा के तहत किया गया ये परीक्षण
गगनयान मिशन के लिए क्रू मॉड्यूल रिकवरी ऑपरेशन की तैयारी के हिस्से के रूप में कोच्चि में भारतीय नौसेना के जल जीवन रक्षा परीक्षण सुविधा (WSTF) में प्रारंभिक रिकवरी परीक्षण किए गए थे। रिकवरी मिशन भारतीय जल में और नौसेना के नेतृत्व में किया। जल उत्तरजीविता परीक्षण सुविधा भारतीय नौसेना की एक अत्याधुनिक सुविधा है जो विभिन्न अनुरूपित स्थितियों और क्रैश परिदृश्यों के तहत खाई में फंसे विमान से बचने के लिए वायुयान कर्मियों को यथार्थवादी ट्रेनिंग देती है। यह विभिन्न समुद्री स्थितियों, पर्यावरणीय स्थितियों और दिन/रात की स्थितियों का अनुकरण करता है, जिससे यह क्रू रिकवरी परीक्षणों के लिए खास हो जाता है।
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जानें क्या है गगनयान, क्यों है भारत के लिए खास
इसरो का गगनयान तीन टन वाला अंतरिक्ष यान कैप्सूल है जो तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाएगा और पृथ्वी के चारों ओर 400 किलोमीटर तक यात्रा करेगा इसके बाद ये वापस आ जाएगा। गगनयॉड कुछ कक्षाओं में दो दिनों तक मिशन की अवधि के बाद पृथ्वी पर सुरक्षित रूप से वापस ले आने के लिये डिजाइन किया गया है। गगनयान के अंतरिक्षयात्री यानी गगननॉट्स गगनयान यानी क्रू मॉड्यूल जिसके अंदर बैठकर अंतरिक्ष में जाएंगे और धरती के चारों ओर 400 किमी तक निचली कक्षा के चक्कर लगाएंगे। ये गगनयान क्रू मॉड्यूल एक डबल वॉल का बड़ा अत्याधुनिक केबिन है जिसमें गगनयॉड्स के लिए हेल्थ सिस्टम, नेविगेशन सिस्टम, फूड हीटर, फूड स्टोरेज, टॉयलेट सभी कुछ होगा।












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