फ्री योजनाओं वाली पॉलटिक्स बना रही राज्यों को गरीब, हिमाचल ही नहीं इन राज्यों की भी जेब हो रही खाली
हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है, राज्य को भारी कर्ज संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों, मुख्य संसदीय सचिव और बोर्ड निगमों के अध्यक्षों ने अगले दो महीनों के लिए अपने वेतन और भत्ते न लेने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य राज्य के बजट पर कुछ वित्तीय दबाव कम करना है।
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता संभालते हुए महज ढा़ई साल ही हुए हैं लेकिन मुफ्त योजनााओं और चुनावी वादों को पूरा करने ने मौजूदा समय में आर्थिक संकट का सामना कर रही है। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है।

आरबीआई कीखुलासा हुआ है कि हिमाचल प्रदेश ही नहीं अन्य कई राज्य मुफ्त योजनाओं के चलते गरीब हाते जा रहे हैं। राज्य पर कर्ज बढ़ता ही जा रहा है। इतना ही नहीं RBI ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक खर्च और खराब ऋण प्रबंधन कई राज्यों की आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल रहा है।
हिमाचल प्रदेश पर बीते एक साल में बढ़ गया कर्ज
हिमाचल प्रदेश की बात करें तो कांग्रेस के सत्ता में आने से पहले राज्य का कर्ज 69,000 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2024 तक 86,600 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। अनुमान है कि मार्च 2025 तक यह 95,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
क्यों कर्ज में डूबी हिमाचल प्रदेश सरकार
हिमाचल प्रदेश के बजट का एक बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन, ऋण, ब्याज भुगतान और विभिन्न मुफ्त योजनाओं के लिए आवंटित किया जाता है। इनमें महिलाओं को मासिक भुगतान, वृद्धावस्था पेंशन योजना और मुफ्त बिजली शामिल हैं। इन मदों पर कुल व्यय लगभग 20,000 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने राज्य की उधार सीमा को कम कर दिया है, जिससे उसके वित्तीय संसाधनों पर और दबाव बढ़ गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक हालिया रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे काफी कर्ज जमा हो रहा है।
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकारों का सब्सिडी खर्च लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकारों ने सब्सिडी पर कुल खर्च का 11.2% खर्च किया था, जबकि 2021-22 में 12.9% खर्च किया था।
किस राज्य पर सबसे अधिक है कर्ज?
आरबीआई के मुताबिक मार्च 2024 तक सभी राज्य सरकारों पर कुल 75लाख करोड़ रुपये का कर्ज था जो 2025 में बढ़कर 83.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। देश में सबसे ज्यादा कर्ज तमिलनाडु पर है।
- तमिलनाडु पर कर्ज 83.3 4 लाख करोड़
- महाराष्ट्र पर 7.22 लाख करोड़
- उत्तर प्रदेश पर 7.269 लाख करोड़
- पश्चिम बंगाल पर 6. 58 लाख करोड़
- कर्नाटक पर 5.97 लाख करोड़
- आंध्र प्रदेश पर 4.85 लाख करोड़
- गुजरात पर 4.67 लाख करोड़
- मध्य प्रदेश पर 4.18 लाख करोड़
- केरल पर 4.29 लाख करोड़
- तेलंगाना पर 3.89 लाख करोड़
- हरियाणा पर 3.36 लाख करोड़
- बिहार पर 3.19 लाख करोड़
- असम पर 1.51 लाख करोड़
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