karnataka election 2023 result: कांग्रेस की जीत के 'चार चाणक्य', जिनका बीजेपी का किला ढहाने में रहा बड़ा हाथ
karnataka election 2023 result, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। पार्टी ने बहुमत का जादुई आंकड़ा छू लिया है। दूसरी ओर बीजेपी के लिए दक्षिण का किला ढह गया है।

कांग्रेस विधानसभा चुनावों की तस्वीर अब साफ हो गई है। दक्षिण भारत के इस राज्य में कांग्रेस को प्रचंड जीत हासिल की है। चुनाव में बीजेपी और जेडीएस 100 सीटों के अंदर ही सिमट गई हैं। कांग्रेस की इस जीत के कई हीरो हैं।
कर्नाटक चुनाव में राज्य के पार्टी चीफ डीके शिवकुमार और पूर्व सीएम सिद्धारमैया मुख्य चेहरा रहे। लेकिन इसके इतर कांग्रेस के रणनीतिकारों ने पर्दे के पीछे रहकर काम किया। कर्नाटक में बीजेपी का किला ढहाने में इन चार नेताओं का बड़ा रोल रहा है।

जी परमेश्वर
एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार के दौरान उपमुख्यमंत्री रहे जी परमेश्वर का इस चुनाव में काफी अहम रोल रहा। जी परमेश्वर को कांग्रेस ने घोषणा पत्र बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। परमेश्वर के नेतृत्व में उनकी टीम ने कर्नाटक के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए घोषणा पत्र बनाया।
जी परमेश्वर ने कांग्रेस के घोषणापत्र में पांच गारंटियां को इस तरह सजाया, जो सीधे जनता के दिलों तक पहुंची। 62 पन्नों के इस घोषणा पत्र में उन्होंने गृह ज्योति योजना के तहत हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली, गृह लक्ष्मी स्कीम में परिवार की महिला मुखिया को 2,000 रुपये प्रति माह की गारंटी दी गई। अन्न भाग्य,युवा निधि जैसी गारंटी शामिल की गई।
हालांकि उनकी एक घोषणा ने पूरे चुनाव में काफी हंगामा मचाया। पीएफआई और बजरंग दल जैसे नफरत फैलाने वाले गुटों पर बैन की बात की थी। जिसे मोदी और भाजपा ने चुनावी मुद्दा बना लिया था। परमेश्वर, एक दलित नेता हैं।

शशिकांत सेंथिल
कांग्रेस में शामिल होने से पहले शशिकांत सेंथिल एक आईएएस अफसर थे। कर्नाटक कैडर के आईएएस सेंथिल ने 2019 में अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 2020 में कांग्रेस ने उन्हें वॉररूम की जिम्मेदारी दी। इससे पहले वह 2009 में भी कांग्रेस के लिए यह जिम्मेदारी संभाल चुके थे।
शशिकांत ने वॉररूम से चुनाव के दौरान एक-एक सीट की स्थिति का पता किया और बड़े नेताओं को रिपोर्ट भेजी। इसे अलावा उन पर बीजेपी नेताओं के बयानों का फैक्ट चेक कर उन पर पलटवार करने की जानकारी भी साझा करते थे। सेंथिल मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले हैं। वह धर्म की राजनीति के धुर विरोधी हैं।

सुनील कानुगोलू
सुनील कानुगोलू को डेटा एनालिसिस का एक्सपर्ट माना जाता है। कर्नाटक के बेल्लारी के रहने वाले कानुगोलू ने अमेरिका से एमबीए की पढ़ाई की है। भारत आने के बाद उन्होंने प्रशांत किशोर की टीम आईपैक के लिए काम किया।
सुनील 2014 में प्रशांत किशोर की कंपनी आईपैक के साथ जुड़े थे। प्रशांत ने मोदी का साथ छोड़ दिया, तब भी सुनील वहां डटे रहे। 2017 में उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को रिकॉर्ड जीत दिलाकर योगी आदित्यनाथ को सीएम की कुर्सी दिलाने में वे अहम सूत्रधार रहे।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की रणनीति भी उन्होंने ही तय की थी। 40% PayCM कैंपेन उन्हीं के दिमाग की उपज है। जिस इस चुनाव में बीजेपी का कोई भी नेता काउंटर नहीं कर पाया। सुनील कानुगोलू का इतना लो प्रोफाइल है कि सोशल मीडिया पर उनका कोई फुटमार्क नहीं है।
सुनील कानुगोलू 6 भाषाओं के जानकार हैं। उनकी तमिल, मलयालम, कन्नड़, हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती भाषा पर अच्छी पकड़ है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के रणनीतिकार सुनील ही रहे हैं।
तेलंगाना से लेकर कश्मीर पहुंचने तक राहुल गांधी की यात्रा किन रास्तों से होकर गुजरेगी, किन मुद्दों को उठाया जाएगा, ये सब की प्लानिंग सुनील कर रहे थे। हर राज्य के लिए वहां की स्थानीय भाषा में यात्रा का थीम सॉन्ग बनाने का प्लान भी उन्हीं का था। इसके आलावा स्थानीय लोगों के साथ बातचीत और स्थानीय खाना जैसे मुद्दों को कैंपेन में शामिल किया।
यात्रा समाप्ति पर कश्मीर पहुंचकर लाल चौक पर तिरंगा फहराने का प्लान भी सुनील का था। इस प्लान पर पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आपत्ति जताई थी, लेकिन सुनील ने कहा था कि इस मूवमेंट का समापन तिरंगा फहराने के साथ ही होना चाहिए। राहुल गांधी को भी सुनील का यह प्लान अच्छा लगा था। जिसके चलते समापन समारोह ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।

एमबी पाटिल
एम. बी. पाटिल. पाटिल कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में शुमार हैं। कांग्रेस के अंदर प्रमुख लिंगायत चेहरा हैं। एम. बी. पाटिल को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की चुनाव अभियान समिति का प्रमुख हैं। कांग्रेस की कैंपने को आक्रमक रखने का श्रेय इन्हें ही दिया जाता है।
एम. बी. पाटिल कर्नाटक के गृह मंत्री और जल संसाधन मंत्री रहे हैं। उन्हें कांग्रेस ने एक बार फिर से बाबलेश्वर विधानसभा सीट से टिकट दिया है। स्थानीय मुद्दों के साथ ही डोर-टू-डोर कैंपेन चलाने का प्लान इन्ही का था। जगदीश शेट्टार को कांग्रेस में लाने के पीछे उनका योगदान माना जाता है। सिद्धारमैया के करीबी कहे जाने वाले एमबी पाटिल के पिता बीएम पाटिल भी बड़े राजनेता थे।
पाटिल कर्नाटक के बीजापुर क्षेत्र से आते हैं। वो कर्नाटक विधानसभा के लिए पांच बार चुने जा चुके हैं, साथ ही लोकसभा के भी सदस्य रहे हैं। वह बीएलडीई एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है।
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