खोखली होती आम आदमी पार्टी के केजरीवाल एकलौते दबंग
नई दिल्ली। परिवर्तन और देश की राजनीति को बदलने का दंभ भरने वाली आम आदमी पार्टी खुद के अंदर की कलह से जूझ रही है। पार्टी की नींव खड़ी करने में अहम भूमिका निभाने वालें नेताओं को एक-एक करके या तो पार्टी से बाहर कर दिया गया या फिर उन्होंने खुद पार्टी से किनारा कर लिया है।
आम आदमी पार्टी के अस्तित्व में आये महज ढाई साल हुए हैं लेकिन पार्टी के भीतर जिस तरह से उसके मूल सिद्धांतों के समझौते को लेकर लोग पार्टी से किनारा कर रहे हैं वह पार्टी के भीतर की हकीकत बयां करती है। योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, मेधा पाटकर ये वो नाम हैं जिन्हें पार्टी का मुख्य धन माना जाता था।
पार्टी के भीतर स्वराज, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, तानाशाही जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं। जिसने ना सिर्फ इस पार्टी को पसंद करने वाले लोगों को बल्कि पार्टी के वालंटियर को भी काफी ठेस पहुंची है। पार्टी से लोगों ने अपार अपेक्षायें संजोयी थी जिसे टूटता देखकर लोग काफी निराश हैं।

आप की कानूनी लड़ाई मजबूत करने वाले प्रशांत अब गद्दार हैं
आम आदमी पार्टी को हर कानूनी दांवपेंच से बाहर निकालने वाले प्रशांत भूषण को आम आदमी पार्टी अब गद्दार मानती है। प्रशांत ने अदालतों के जरिए कई बड़े भ्रष्टाचार को उजागर करके आप की साख को देशभर में बढ़ाया था।

आप को 50 सीटों से ज्यादा का दावा करने वाले योगेंद्र हैं षड़यंत्रकारी
दिल्ली चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी को 50 से अधिक सीटों का हर हाल में दावा करने वाले योगेंद्र यादव पर पार्टी ने चुनाव में हराने का षड़यंत्र रचने का आरोप लगाया। योगेंद्र अपनी राजनीति समझ के चलते पार्टी को हर मंच पर शिखर पर ले गये थे।

जमीन की लड़ाई लड़ने वाली मेधा ने भी आप को बताया अलोकतांत्रिक
मेधा पाटकर समाजसेवा के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं जिन्हें बच्चा-बच्चा जानता है, उन्होंने पार्टी में लोकतंत्र की कमी और अभ्रदता के चलते पार्टी को अलविदा कह दिया। पार्टी ने मेधा पाटकर की भी शिकायत को दरकिनार कर दिया।

मयंक पांडे ने केजरीवाल की कार्यशैली पर खड़े किये सवाल
महाराष्ट्र में आप का अहम चेहरा मयंक पांडे ने पार्टी की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा किया है। उन्होंने एक पत्र के जरिए योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पर लगाये जा रहे आरोपों पर केजरीवाल पर निशाना साधा था। साथ ही उन्होंने कई ऐसे फैसलों पर सवाल उठाये जो कि पार्टी में लोकतंत्र की कमी को दर्शाता है।

दमानिया ने केजरीवाल के दोहरे रवैये पर सवाल उठाया
अरविंद केजरीवाल के स्टिंग के बाद दमानिया ने पार्टी से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि उन्होंने केजरीवाल का हमेशा साथ दिया लेकिन जिस तरह से उन्होंने स्टिंग में कांग्रेस के विधायकों को खरीदने की कोशिश की वह दुखद है। इसके बाद वह आप से अपने आपको कतई जुड़ा नहीं रख सकती हैं।

पार्टी के लिए पसीना बहाने वाल अजीत झा भी आप के लिए हैं गद्दार
अजीत झा आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर दिया। पार्टी में अरविंद के समर्थकों ने उन्हें गद्दार का तमगा दे दिया।

लोकपाल की लड़ाई लड़ने वाली आप ने लोकपाल को ठुकराया
लोकपाल की लड़ाई से शुरु हुए अन्ना आंदोलन के बाद राजनीति में आने वाली आम आदमी पार्टी ने अपने ही लोकपाल को बिना किसी वजह के उन्हें उनके पद से हटा दिया। यही नहीं उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक तक में नहीं शामिल होने दिया। रामदास ने कहा कि वह इस फैसले से काफी आहत हैं।

हर मोर्चे पर पार्टी का साथ देने वाले आनंद कुमार भी हो गये षड़यंत्रकारी
प्रोफेसर आनंद कुमार आम आदमी पार्टी का वह चेहरा थे जो पार्टी का हर मोर्चे पर समर्थन करते थे। लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्हें भी गद्दार और षड़यंत्रकारी के तमगे से नवाजा गया।












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