अयोध्या फैसले पर अब यशवंत सिन्हा ने उठाए सवाल, आडवाणी को लेकर भी किया बड़ा दावा

अयोध्या फैसले पर सवाल उठाते हुए यशवंत सिन्हा ने वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को लेकर बड़ा बयान दिया है...

नई दिल्ली। अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बावजूद ये विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की रविवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। वहीं, केस में मुस्लिम पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने साफ कर दिया है कि उन्हें अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर है और वो इस मामले को अब और आगे नहीं ले जाना चाहते। अयोध्या मामले को लेकर अब पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही यशवंत सिन्हा ने वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को लेकर भी बड़ी बात कही है।

'फैसला खामियों से भरा, लेकिन...'

'फैसला खामियों से भरा, लेकिन...'

यशवंत सिन्हा ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा, 'अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला दोषपूर्ण है। यह फैसला खामियों से भरा हुआ है, लेकिन मैं फिर भी मुस्मिल समुदाय से कहूंगा कि वो अब इस फैसले को स्वीकार करें और बाकी चीजों को अब पीछे छोड़ दें। चलिए आगे बढ़ते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब कोई फैसला नहीं।' यशवंत सिन्हा ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि लालकृष्ण आडवाणी और अन्य बड़े भाजपा नेताओं को शुरुआत में राम मंदिर आंदोलन का श्रेय लेने से पहले बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर 'पछतावा' था।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन पर भी उठाए सवाल

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन पर भी उठाए सवाल

आपको बता दें कि वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा कई मौकों पर केंद्र की मोदी सरकार पर भी तीखा हमला बोल चुके हैं। हाल ही में यशवंत सिन्हा ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले पर ट्वीट करते हुए कहा था, 'महाराष्ट्र के राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर, वास्तव में केंद्र के 'एजेंट' के रूप में काम किया है। तीन दलों के अध्यक्षों को अब सख्ती से सामने आना चाहिए और अपने मतभेदों को सुलझाते हुए सरकार बनानी चाहिए।'

विवादित जमीन रामलला विराजमान को

विवादित जमीन रामलला विराजमान को

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को सुनाए गए अपने फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन रामलला विराजमान को सौंपते हुए केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वो अयोध्या में ही किसी अन्य जगह पर 5 एकड़ जमीन मुस्लिम पक्ष को दे। इस फैसले को लेकर अपनी असहमति जताते हुए एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि भारत के मुस्लिम को खैरात की जरूरत नहीं है। हमें संविधान पर पूरा भरोसा है और हम अपने कानूनी हक की लड़ाई लड़ रहे थे। हमें 5 एकड़ जमीन के प्रस्ताव को ठुकरा देना चाहिए। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हूं।'

इकबाल अंसारी बोले- मुझे फैसला मंजूर

इकबाल अंसारी बोले- मुझे फैसला मंजूर

हालांकि मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी सहमति जताई है। ओवैसी के बयान को लेकर जब इकबाल अंसारी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, मैं उसका पूरी तरह सम्मान करता हूं। हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़े, लेकिन कुछ लोग हैं जो सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में हम खुद पक्षकार हैं, कोई क्या कह रहा है, हमें परवाह नहीं है और ना ही मैं इस मामले में कोई पुनर्विचार याचिका दाखिल करने वाला हूं। मैं बस इतना चाहता हूं कि हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच भाईचारा बना रहे। अब सरकार तय करे कि वो हमें जमीन किस जगह पर दे रही है। जमीन मिलने के बाद हमारी कमेटी तय करेगी कि मस्जिद का निर्माण कैसे होना है।'

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