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कल्याण सिंह: बाबरी ढांचे की आखिरी ईंट गिरते ही लिख दिया था अपना इस्तीफा, जानिए क्या था वो किस्सा

जब बाबरी ढांचे की ईंट गिरते ही कल्याण सिंह ने लिखा इस्तीफा

लखनऊ, 22 अगस्त। देश की राजनीति को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह का 89 वर्ष की उम्र में शनिवार देर रात निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे और बीते एक सप्ताह से उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी। पूर्व सीएम को लखनऊ के संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती कराया गया था। कल्याण सिंह के निधन के साथ ही राजनीति में एक सदी का अंत हो गया, उनकी गिनती बीजेपी के दिग्गज नेताओं में की जाती थी। उनका राजनीतिक करियर काफी संघर्षपूर्ण रहा, साथ ही वह कई विवादों से भी घिरे रहे।

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    कल्याण सिंह ने राजनीति में अपनी अलग छवि

    कल्याण सिंह ने राजनीति में अपनी अलग छवि

    साल 1992 में जब अयोध्या में कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिराया तो उस समय कल्याण सिंह ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। मस्जिद का ढांचा गिरने के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था, इस दौरान उन पर लापरवाही के आरोप भी लगे। कल्याण सिंह ने राजनीति में अपनी अलग छवि बनाई, उनकी विचारधारा कई लोगों को पसंद नहीं आती थी। उन्हें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का नायक भी माना जाता है।

    राम मंदिर आंदोलन का चेहरा थे कल्याण सिंह

    राम मंदिर आंदोलन का चेहरा थे कल्याण सिंह

    इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था और इसका सूत्रधार कल्याण सिंह को ही बताया जाता है। उन्हीं की बदौलत यह आंदोलन उत्तर प्रदेश से निकल कर पूरे देश में फैल गया था। कल्याण सिंह शुरू से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के जूझारू कार्यकर्ता थे और राम मंदिर आंदोलन में उन्हें संघ का भी पूरा समर्थन प्राप्त हुआ। कल्याण सिंह की हिंदुत्व छवि का फायदा बीजेपी को भी मिला और 1991 में यूपी में पार्टी ने सरकार बनाई।

    कल्याण सिंह के कार्यकाल में गिरा था बाबरी ढांचा

    कल्याण सिंह के कार्यकाल में गिरा था बाबरी ढांचा

    उत्तर प्रदेश में यह पहला मौका था जब बीजेपी ने इतने प्रचंड बहुमत के साथ कल्याण सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई। इस दौरान मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद कल्याण सिंह के कार्यकाल में राम मंदिर आंदोलन उग्र हो चुका था, इसका नतीजा यह हुआ कि साल 1992 में हजारों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया। इस घटना के बाद ना सिर्फ देश में बल्कि विदेश में भी हंगामा मचा। ढांचा गिरने के साथ ही कल्याण सिंह ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर, 1992 को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था।

    हाई कोर्ट के पूर्व जज ने बताया था मुख्य दोषी

    हाई कोर्ट के पूर्व जज ने बताया था मुख्य दोषी

    देश में मचे हंगामे के बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने कल्याण सिंह पर बाबरी मस्जिद विध्वंस की साजिश रचने का आरोप तक लगा दिया। इस घटना के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व एमएस लिब्राहन ने पूरे मामले की रिपोर्ट पेश की और पूर्व सीएम कल्याण सिंह को मुख्य दोषी करार दिया। हालांकि कल्याण सिंह आखिरी सांस तक बाबरी ढांचा गिराए जाने में अपनी भूमिका से इनकार करते रहे। एक टीवी शो में कल्याण सिंह ने कहा था कि जिस रिपोर्ट को 17 सालों में तैयार किया गया उसे 70 दिन में तैयार किया जा सकता था।

    'गोली चलाने का नहीं दिया आदेश'

    'गोली चलाने का नहीं दिया आदेश'

    बाबरी विध्वंस की साजिश के आरोप पर बोलते हुए कल्याण सिंह ने कहा था,

    अपनी रिपोर्ट में लिब्राहन साहब ने मुझे साजिशकर्ता बताया है जो पूरी तरह गलत है। मैंने अपने अधिकारियों को आदेश दिया था कि बाबरी ढांचे की सुरक्षा के लिए जो भी उचित कदम उठाना पड़े उठाइए, लेकिन मैनें गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था क्योंकि इससे हजारों लोगों की जान जा सकती थी और ढांचे को फिर भी बचाया नहीं जा सकता था।

    बाबरी विध्वंस के बाद खुद लिखा अपना इस्तीफा

    बाबरी विध्वंस के बाद खुद लिखा अपना इस्तीफा

    पूर्व सिएम के प्रधान सचिव रहे योगेंद्र नारायण ने बताया था कि बाबरी मस्जिद की आखिरी ईंट गिरते ही कल्याण सिंह ने राइटिंग पैड मंगवाया और अपने हाथों से अपना त्याग पत्र लिखा। इतना ही नहीं वह खुद अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने उनके निवास स्थान पहुंचे थे। कल्याण सिंह के निधन पर अब उनसे जुड़ी कई ऐतिहासिक घटनाओं को याद किया जा रहा है। सीएम योगी ने बताया कि 23 अगस्त को नरौरा में गंगा तट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उस दिन यूपी में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

    यह भी पढ़ें: कल्याण सिंह का अवसान; बालेश्वर त्यागी ने कहा- वो राजनीति में लाभ-हानि नहीं सोचते थे, उनकी कमी हमेशा खलेगी

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