कल्याण सिंह का अवसान; बालेश्वर त्यागी ने कहा- वो राजनीति में लाभ-हानि नहीं सोचते थे, उनकी कमी हमेशा खलेगी
लखनऊ, 21 अगस्त: राम मंदिर के नायक और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम कल्याण सिंह नहीं रहे। उनके जाने के बाद उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके साथ काम करने वाले भी उनके जाने के बाद काफी दुखी हैं। कल्याण सिंह की सरकार में उनके साथ राजस्व राज्य मंत्री के तौर पर काम करने वाले बालेश्वर त्यागी ने कहा कि उनके जाने के बाद उनकी कमी और भरपायी होना आज की राजनीति में मुमकिन नहीं है। वह राजनीति शौकिया नहीं करते थे, वह समाज कैसा हो इस दृष्टिकोण के साथ काम करते थे।

पूर्व मंत्री बालेश्वर त्यागी ने वन इंडिया डॉट काम से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान पूर्व सीएम के साथ बिताए गए अपने अनुभव को साझा किया। बालेश्वर त्यागी ने कहा कि वो बहुत ही बेहतरीन नेता थे, जनभावनाओं की गहरी समझ थी। उन्होंने सच में राजनीति में कमिटमेंट के साथ काम किया। वह अपने साथ काम करने वालों को सदैव अच्छे के लिए प्रेरित करते थे और यही अपेक्षा करते थे अच्छा काम करें। मरे बहुत सारे अनुभव हैं जो उनके साथ बिताए थे। कई ऐसे मामले आए थे वो उनकी इनकी इच्छा विपरीत नहीं थी। कभी दबाव नहीं बनाया और नाराजगी व्यक्त नहीं की।
बालेश्वर त्यागी ने कहा कि,
''उनकी कमी फिलहाल पूरी नहीं हो सकती थी। वो राजनीति शौकिया नहीं करते थे। वो समाज कैसा हो स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ काम करते थे। अब तो राजनीति में कमिटमेंट नहीं है। हर बात में वो लाभ हानि नहीं सोचते थे। वो इसकी चिंता नहीं करते थे। उन्होंने ऐतिहासिक काम किया। वो अयोध्या में ढांचा में गिरने के बाद कहा था कि मैं लिखित देने को तैयार हूं कि भीड़ पर गोली नहीं चलाउंगा।''
जनसंघ के राष्ट्रीय अधिवेशन में हुई थी कल्याण सिंह से मुलाकात
पूर्व राजस्व राज्यमंत्री ने कहा, ''कल्याण सिंह जी से हमारा परिचय 1971 में जनसंघ के राष्ट्रीय अधिवेशन के समय हमारे हिन्दी के अध्यापक डा. रामरजपाल द्विवेदी ने कराया तब ही उनके विनोदी स्वभाव से अवगत हुए। वर्ष 1972 में सबसे पहली बार अपने गाँव की चकबन्दी में धाँधली की शिकायत कल्याण सिंह को भेजी थी। उस शिकायत को उन्होंने अपने पत्र के साथ चकबन्दी आयुक्त को भेजा था तथा इस आशय का एक पोस्टकार्ड गांव के पते पर मुझे भी भेजा था।''
त्यागी ने कहा कि हम उन कल्याण सिंह के अनुयायी थे जिनके मुख्यमन्त्रित्व काल में भाजपा द्वारा सुशासन का इतिहास रचा गया। हम तब भी कल्याण सिंह के साथ नहीं गए जब वह भाजपा छोड़कर गए और न आज कल्याण सिंह के साथ हैं जब वह हमें छोड़कर चले गए। उनके जैसा नेता यूपी की सियासत में मिलना काफी कठिन है।
लखनऊ के एसजीपीजीआई में हुआ निधन
उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का लखनऊ के संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में सेप्सिस और मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण निधन हो गया। उन्हें 4 जुलाई को संजय गांधी पीजीआई के आईसीयू में गंभीर अवस्था में भर्ती किया था।
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