देश के चुनावी इतिहास में पहली बार, BJP ने इन दोनों सीटों पर उतारे मुस्लिम महिला उम्मीदवार

नई दिल्ली- भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए चुनावी इतिहास में पहली बार दो-दो मुस्लिम महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी की ये दोनों महिला मुस्लिम प्रत्याशी केरल में होने वाले स्थानीय निकाय के चुनाव में मलप्पुरम जिले की दो अलग-अलग सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी के रूप में अपनी चुनावी किस्मत आजमा रही हैं। गौरतलब है मलप्पुरम एक मुस्लिम-बहुल इलाका है और इसे इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का गढ़ माना जाता है। बीजेपी ने अब तक कई मुस्लिम पुरुषों को अपना प्रत्याशी बनाया है, लेकिन मुस्लिम महिला को पार्टी ने इससे पहले कभी भी टिकट नहीं दिया था। वैसे हाल के दिनों में काफी संख्या में मुस्लिम महिलाएं भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय होती देखी जा रही हैं।
(तस्वीर-सांकेतिक)

For the first time in the countrys electoral history, BJP fielded Muslim women candidates in Kerala

केरल के मलप्पुरम में कई सीटों पर भाजपा ने मुस्लिम पुरुषों को अपनी पार्टी का प्रत्याशी बनाया है, लेकिन सिर्फ दो महिला मुस्लिम उम्मीदवार चर्चा का विषय बन गई हैं। बीजेपी की टिकट पर वानदूर ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 6 से उम्मीदवार टीपी सुल्फथ वानदूर की रहने वाली हैं। जबकि आयशा हुसैन चेम्माड की रहने वाली हैं और पोनमुडम ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर 9 से भाग्य आजमा रही हैं। भाजपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने की दोनों मुस्लिम महिलाओं की अलग-अलग वजहें हैं।

सुल्फथ केंद्र की बीजेपी सरकार की 'प्रगतिशील' नीतियों से प्रभावित हैं, जिसने देश की मुस्लिम महिलाओं की बेहतरी के लिए बदलाव करके उनकी किस्मत बनाई है। जबकि, आयशा हुसैन इसलिए भाजपा से जुड़ी हैं, क्योंकि उनके पति इससे जुड़े हुए हैं। सुल्फथ को लगता है कि मोदी सरकार की हालिया नीतियों ने मुस्लिम महिलाओं पर काफी प्रभाव डाला है। उनका कहना है कि, 'ट्रिपल तलाक पर बैन और महिलाओं की शादी की उम्र 18 से 21 वर्ष करने जैसे दो बड़ी नीतियों ने मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। मुस्लिम महिलाओं के कल्याण के लिए यह बहुत ही बड़े कदम हैं। सिर्फ मोदी ही इस तरह के ऐतिसाहिसक फैसले लेने की हिम्मत दिखा सकते हैं।' दो बच्चों की मां सुल्फत की शादी 15 साल की उम्र में ही हो गई थी।

उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों से मुस्लिम महिलाओं के जीवन में कितनी मदद मिलेगी, वह वही समझ सकती हैं, जो कम उम्र में शादी करने का दुख-दर्द झेल चुकी हैं। सुल्फत का सपना था कि पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी करें, लेकिन बचपन में शादी हो जाने के चलते उन्हें 10वीं में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी। सुल्फत अभी अपने परिवार के ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट के कारोबार में हाथ बटाती हैं और अपनी वार्ड से चुनाव जितने की उम्मीद कर रही हैं।

आयशा हुसैन के पति भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के सक्रिय सदस्य हैं। वो उन्हीं की वजह से बीजेपी को समझीं और उससे प्रभावित हुई हैं। 10 साल की बेटी की मां मोदी सरकार की मुस्लिम महिलाओं के हित वाली नीतियों की समर्थक हैं। वो कहती हैं, 'मैं देश के कल्याण के लिए साहसिक नीतियों की वजह से मोदीजी और बीजेपी का समर्थन करती हूं।' इनके पति हुसैन वारिकोट्टिल भी मलप्पुरम जिला पंचायत के लिए एडारिकोड डिविजन से भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। हालांकि, यह इलाका मुस्लिम लीग का गढ़ माना जाता है, लेकिन भाजपा को उम्मीद है कि मुस्लिम महिलाओं को टिकट देकर वह अपना हिंदू-केंद्रित पार्टी होने की पहचान तो बदल ही रही है, उसके उम्मीदवार चुनाव में हवा भी बदल सकते हैं।

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