दादी के कदमों पर चलकर भाई से लाइमलाइट छीनी प्रियंका गांधी ने
नई दिल्ली। प्रियंका गांधी, देश के पहले राजनीतिक परिवार की एक ऐसा शख्सियत जिसके पास कोई भी राजनीतिक पद या जिम्मेदारी नहीं है लेकिन फिर भी इसके बावजूद, वह जहां भी जाती हैं, अपना एक अलग ही असर छोड़ती हैं। राजनीति से दूरी बनाने वाली प्रियंका अक्सर चुनावों के समय इस कदर राजनीतिक रंग में डूब जाती हैं कि उनके आगे राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी भी मात खा जाते हैं।
रायबरेली में अपनी मां सोनिया और अमेठी में अपने भाई राहुल के लिए चुनाव प्रचार करने वाली प्रियंका गांधी पिछले कुछ दिनों से राजनीति के ऐसे-ऐसे दांव खेल रही हैं कि उनके परिवार के बाकी सदस्यों की जगह अब सबका सारा ध्यान बस प्रियंका पर ही कन्द्रित हो गया है।
विशेषज्ञो को प्रियंका में उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अक्स नजर आने लगा है। वह इस बात को कहने लगे हैं कि अब प्रियंका के तेवर बिल्कुल अपनी दादी के जैसे ही नजर आने लगे हैं। वह जिस अंदाज में जनता के साथ बात करती थीं, चलती थीं और यहां तक जिस तरह से रैलियों में जनता को संबोधित करती थीं, प्रियंका का अंदाजा हूबहू वैसा ही है।
पिछले 10 दिनों से सिर्फ प्रियंका गांधी के तेवरों की वजह से उनके भाई राहुल गांधी सुर्खियों में कम ही नजर आ रहे हैं। साफ है प्रियंका ने कभी अपने बयानों तो कभी अपने एक्शन के जरिए खबरों में बनी हुई है। एक नजर डालिए कि आखिर क्यों लोग अब प्रियंका गांधी में इंदिरा की झलक देखने लगे हैं।

दादी की ही तरह बोलती हैं प्रियंका
राजनीति को करीबी से देखने वाले लोग कहते हैं कि अपने विरोधियों पर प्रियंका उसी अंदाज में हमले करती हैं जैसे उनकी दादी इंदिरा किया करती थीं। उनके चेहरे के हावभाव बिल्कुल इंदिरा गांधी जैसे ही होते हैं।

इंदिरा और प्रियंका का साड़ी स्टाइल भी एक
इंदिरा गांधी अक्सर चुनावी रैलियों में खादी या फिर हैंडलूम की बनीं साड़ियों को प्राथमिकता देती थीं और प्रियंका गांधी भी उसी तरह से अक्सर हैंडलूम या फिर खादी की बनीं साड़ियों को ही प्राथमिकता देती नजर आती हैं। विशेषज्ञों की राय में दोनों का ही मकसद एक था और वह था जनता के बीच यह संदेश देना कि वह भी उनकी तरह ही एक आम इंसान हैं।

नमस्ते कह कर मिलती जनता से
जिस तरह से इंदिरा गांधी नमस्ते के साथ जनता से रैलियों या फिर जनसभाओं में मुखातिब होती थीं, उसी तरह से प्रियंका भी अपनी रैलियों या फिर जनसभाओं की शुरुआत नमस्ते के साथ करती हैं। जनता के साथ बेहतरीन कम्यूनिकेशन स्थापित करने की कला इंदिरा की ही तरह प्रियंका को भी बखूबी आती है।

जनता के बीच दूरी कम करना
कैसे जनता के बीच पहुंचकर और उन्हीं के अंदाज को अपनाकर दूरियों को कम कर राजनीतिक मकसद को हासिल किया जाए, यह कला शायद प्रियंका ने अपनी दादी से ही सीखी है।

भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी को तैयार
जिस तरह से इंदिरा गांधी को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी और वह उसके लिए पूरी तरह से तैयार थीं, उसी तरह से प्रियंका भी एक बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार नजर आती हैं।












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