'कांग्रेस राज में होती थी लिंचिंग', संसद में घमासान, राज्यसभा में भड़की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
Nirmala Sitharaman: संसद के बजट सत्र में 5 फरवरी 2026 को एक हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्षी नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर तीखा हमला बोला। सदन में जब खड़गे ने "लिंचिंग" जैसे गंभीर शब्द का इस्तेमाल कर सरकार को घेरने की कोशिश की, तो वित्त मंत्री ने न केवल इस पर कड़ी आपत्ति जताई, बल्कि इसे सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने की मांग भी की।
सीतारमण ने कांग्रेस को उनके अपने शासनकाल की याद दिलाते हुए उन विवादित घटनाओं का जिक्र किया जिन्होंने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। इस बहस ने सदन के तापमान को बढ़ा दिया, जहां एक ओर विपक्ष हमलावर था, तो दूसरी ओर वित्त मंत्री ने तथ्यों के साथ कांग्रेस के दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

निर्मला सीतारमण का कांग्रेस के 'लिंचिंग' दावों पर कड़ा प्रहार
सदन को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने मल्लिकार्जुन खड़गे के "लिंचिंग" शब्द के प्रयोग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं विपक्ष के नेता का सम्मान करती हूं, लेकिन उन्होंने जिस 'लिंचिंग' शब्द का सहारा लिया है, वह पूरी तरह गलत है।" वित्त मंत्री ने स्पष्ट रूप से सभापति से आग्रह किया कि इस शब्द को रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए क्योंकि यह देश की छवि और सदन की गरिमा के खिलाफ है।
कांग्रेस शासित राज्यों की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
सीतारमण ने कांग्रेस को घेरते हुए राजस्थान और केरल की कुछ दर्दनाक घटनाओं का हवाला दिया, जिसमें-
राजस्थान का कन्हैया लाल कांड: उन्होंने याद दिलाया कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान एक निर्दोष दर्जी की सरेआम हत्या कर दी गई थी, लेकिन उस समय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।
नूपुर शर्मा विवाद और हिंसा: वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा प्रवक्ता की टिप्पणी के बाद राजस्थान में जो भी हिंसा और लिंचिंग जैसी घटनाएं हुईं, वे कांग्रेस के शासनकाल में ही फली-फूलीं।
केरल का फादर जोसेफ मामला: उन्होंने सदन में केरल की उस भयावह घटना का भी जिक्र किया जिसमें एक शिक्षक, फादर जोसेफ के हाथ काट दिए गए थे। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या उस समय कांग्रेस ने नैतिकता के आधार पर कोई जवाबदेही तय की थी?
विपक्ष को नसीहत
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में विपक्ष को आईना दिखाते हुए कहा कि केंद्र पर गंभीर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपने शासनकाल के काले पन्नों और अपने राज्यों की वर्तमान स्थिति का गहराई से अवलोकन करना चाहिए। उन्होंने साफ़ किया कि गंभीर मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय विपक्ष को तथ्यों पर बात करनी चाहिए।












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