Flashback 2020: भारतीय राजनीति के वे बड़े नेता जिन्होंने 2020 में बदल लिया पाला
नई दिल्ली। साल 2020 के खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। यह साल ना सिर्फ महामारी के लिहाज से बल्कि राजनीतिक हिसाब से काफी उथल-पुथल भरा रहा। इस साल कई बड़े नेता अपनी पार्टियों को छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हो गए। इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया का है। लंबे समय तक कांग्रेस में रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया इस साल की शुरुआत में बीजेपी में शामिल हो गए थे। जिसका नतीजा ये हुआ कि, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई। बागी नेता में लिस्ट में अन्य बड़े नाम टीएमसी नेता शुभेंदु अधिकारी, बीजेपी नेता एकनाथ खडसे, चंद्रिका राय , उर्मिला मंतोड़कर समेत कई नाम हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा और कांग्रेस के अहम नेता माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस साल मार्च में कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था। मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले सिंधिया को पूर्व सीएम कमलनाथ से लगातार परेशानी हो रही है। वे लगातार अपनी सरकार का विरोध कर रहे थे। इसके बाद मार्च में वे 22 कांग्रेस विधायकों के साथ बागी हो गए। जिससे मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिर गई। ज्योतिरादित्य 22 विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए।

शुभेंदु अधिकारी
पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी टीएमसी के कई बड़े नेता बागी हो गए हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम शुभेंदु अधिकारी का है। ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी कैबिनेट और विधायकी से इस्तीफा दे दिया है। वे पूर्वी मिदनापुर की नंदीग्राम सीट से विधायक थे। पिछले कुछ समय से पार्टी की लीडरशिप से दूरी बनाए हुए थे। शुभेंदु का जाना पार्टी के साथ ममता के लिए भी झटका है। माना जा रहा है कि वे बीजेपी में शामिल होंगे। इसी बीच उन्होंने बीजेपी नेता अमित शाह से भी मुलाकात की है। उनके साथ जीतेंद्र तिवारी समेत कई अन्य नेता भी टीएमसी का साथ छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले हैं।

एकनाथ खडसे
भाजपा (BJP) में चार दशकों तक राजनीति की पारी खेलने वाले महाराष्ट्र (Maharashtra) के दिग्गज नेता एकनाथ खडसे (Eknath Khadse) ने आखिरकार इस साल पार्टी को अलविदा कह दिया। एकनाथ खड़से ने शरद पवार की पार्टीनेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) जॉइन कर ली। बीजेपी के साथ संबंधों में खटास आने के बाद खड़से ने बीजेपी से अपने रास्ते अलग कर लिए थे। खडसे पूर्व मंत्री एवं राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष रह चुके हैं। उन्होंने 2016 में तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद में पद से इस्तीफा दे दिया था और तबसे ही नाराज चल रहे थे।

सचिन पायलट
मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में कांग्रेस समर्थित सरकार में बगाबत देखने को मिली थी। यहां पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर आरोप लगाते हुए डिप्टी सीएम सचिन पायलट बागी हो गए थे। पायलट लगभग एक दर्जन विधायकों को लेकर गुरुग्राम आ गए थे। जिसके बाद कई सप्ताह तक राज्य में सियासी ड्रामा चला। हालांकि कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद यह बगाबत दबा दी गई। और सचिन पायलट वापस कांग्रेस में आ गए।

उर्मिला मंतोड़कर
एक्ट्रेस से पॉलिटिशियन बनी उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने तकरीबन 20 महीने बाद राजनीति की दूसरी पारी की शुरुआत कर दी है। उर्मिला शिवसेना (Shiv Sena) में शामिल हो गईं। तकरीबन साल भर पहले कांग्रेस के अदर 'तुच्छ राजनीति' का आरोप लगाकर इस्तीफा दे दिया था। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यानी 27 मार्च 2019 को कांग्रेस में शामिल हुई उर्मिला ने मुंबई नार्थ सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि, कड़ी मेहनत के बावजूद एक्ट्रेस चुनाव हार गईं थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए 10 सितंबर 2019 को पार्टी छोड़ दी थी।

चंद्रिका राय
लालू प्रसाद यादव के समधी और तेज प्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय इस साल आरजेडी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए थे। उन्होंने लालू परिवार से अपनी नाराजगी के बाद खेमा बदल लिया था। दरअसल तेज प्रताप यादव की पत्नी एश्वर्या राय द्वारा लालू पर गंभीर आरोप लगाने के बाद उनका घर छोड़ दिया है। दोनों ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दी है। चंद्रिका राय का पार्टी छोड़ने का यही एक मात्र कारण था।

खुशबू सुंदर
फिल्म अभिनेत्री खुशबू सुंदर कांग्रेस पार्टी का दामन छोड़ पिछले महीने भाजपा में शामिल हो गईं। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत खुशबू ने 2010 में डीएमके पार्टी के साथ की थी, बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गई थीं। उन्होंने एक कांग्रेस अध्यक्ष के नाम लिखा है और इसमे कहा है कि ऊंचे पदों पर बैठे कुछ लोग जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं, इन लोगों का आम जनता से कोई जुड़ाव नहीं है और ये लोग अपनी मनमानी चला रहे हैं।

रामेश्वर चौरसिया
इस साल बिहार में हुए विधानसभा चुनावों से पहले चार बार विधायक और उत्तर प्रदेश बीजेपी के सह-प्रभारी रहे रामेश्वर चौरसिया ने बीजेपी का साथ छोड़ चिराग पासवान का दामन थाम लिया था। बिहार की जातीय राजनीति में चौरसिया समाज के नेता रामेश्वर बीजेपी के सीनियर नेताओं में से माने जाते हैं। चौरसिया नोखा विधान सभा सीट से लगातार चार बार साल 2000, 2005 (फरवरी और नवंबर) और 2010 में जीत चुके हैं।

इमरती देवी
सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में कैबिनेट मंत्री रही इमरती देवी भी शामिल थीं। हाल ही में हुए मध्यप्रदेश उपचुनाव में वे बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़ी थीं। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के दौरान इमरती देवी को लेकर कमलनाथ द्वारा की गई टिप्पणी के बाद वे सुर्खियों में रही थीं।

रघुवंश बाबू
पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार के दिग्गज नेता रहे डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का सितंबर में निधन हो गया था। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के करीबी नेताओं में से एक रघुवंश बाबू ने कुछ दिन पहले ही पार्टी से इस्तीफा देकर प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh prasad singh) ने एम्स के बेड से एक चिट्ठी लिखी और महज 38 शब्दों के संदेश के साथ उन्होंने RJD के साथ अपना 32 साल पुराना नाता तोड़ दिया था।












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