हाशिमपुरा नरसंहार मामले में दोषी पांच और पीएसी जवानों ने किया सरेंडर
नई दिल्ली। मेरठ के हाशिमपुरा नरसंहार मामले में दोषी पाए गए पीएसी के पांच और जवानों ने दिल्ली की एक अदालत में मंगलवार को सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने सरेंडर ना करने वालों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। 1987 में हाशिमपुरा में हुए नरसंहार में 42 मुसलमानों को मार दिया गया था। मेरठ के हाशिमपुरा में 31 साल पहले हुए नरसंहार में दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 अक्टूबर को सभी 16 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

22 नवंबर को हाशिमपुरा दंगा मामले में यूपी पीएसी के चार जवानों ने दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में सरेंडर किया था, जिन्हें जेल भेज दिया गया। कोर्ट ने बाकी बचे आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। पांच और दोषियों ने मंगलवार को सरेंडर किया है। इस मामले में 19 आरोपी थे, जिमें से लंबे मुकदमे के दौरान तीन की मौत हो गई थी। नरसंहार मामले में दोषी 16 जवान सेवानिवृत्त हो चुके है।
1987 में हाशिमपुरा में पीएसी की 41 बटालियन ने हाशिमपुरा से 42 मुसलमानों को उठा लिया गया था। पीएसी इन्हें ट्रक मे बैठाकर ले गई थी और गंगनहर के किनारे ले जाकर कतार में खड़ा कर गोली मार नृशंस हत्या कर दी थी। इसमें 42 लोगों की मौत की बात सामने आई थी। गाजियाबाद में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रहे विभूति नारायण राय ने 22-23 मई, 1987 की रात को मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज की थी।
इस मामले में आरोप-पत्र मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, गाजियाबाद के समक्ष 1996 में दाखिल किया गया था। नरसंहार पीड़ितों के परिवारों की एक याचिका के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को सितंबर 2002 में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था। बीते माह पीएसी जवानों को दोषी करार दे सजा सुनाते हुए अदालत ने इसे एक समुदाय के निहत्थे और निर्दोष लोगों का नरसंहार करार दिया।












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