चीन-पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब, शुरू हुआ चाबहार बंदरगाह
नई दिल्ली। चाबहार पोर्ट का पहला फेज शुरू हो गया है। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने रविवार को इसका उद्घाटन किया। पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए ईरान, भारत और अफगानिस्तान के बीच इस नए कॉरीडोर की शुरूआत की गई। इस उद्घाटन समारोह के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद थीं। ये बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

इस बंदरगाह के जरिए भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच नए रणनीतिक ट्रांजिट रूट शुरू हो जाएंगे। चाबहार बंदरगाह के पहले चरण को शाहिद बेहेश्टी बंदरगाह के तौर पर जाना जाता है। इस मौके पर ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह ईरान, भारत के परस्पर और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करता है। आपको बताते हैं कि आखिर चाबहार बंदरगाह भारत के लिए खास क्यों है?
- इस बंदरगाह के शुरू होने के बाद अब भारत बिना पाकिस्तान गए ही अफगानिस्तान, रूस और यूरोप से जुड़ सकेगा। आपको बता दें कि फिलहाल भारत को अफगानिस्तान जाने के लिए पाकिस्तान से जाना पड़ता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
- आपको बता दें कि कांडला और चाबहार बंदरगाह के बीच दूरी अब दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी से भी कम होगी। यानी भारत और ईरान के बीच अब सामान आसानी और तेजी से पहुंचाया जा सकेगा।
- इस नए मार्ग से भारत और ईरान, अफगानिस्तान के बीच व्यापार में लागत और समय दोनों कम लगेगा।
- सबसे खास यह है कि चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान में चीन द्वारा संचालित ग्वादर पोर्ट से करीब 100 किमी ही दूर है। चीन 46 अरब डॉलर खर्च कर ग्वादर पोर्ट बनवा रहा है और इस पोर्ट के जरिए एशिया में नए व्यापार और परिवहन मार्ग खोलना चाहता है।
- इस बंदरगाह की मदद से अफगानिस्तान की सीमा तक सड़क और रेल यातायात का विकास होगा और अफगान के साथ-साथ पूरे मध्य एशिया में भारत की पहुंच सुनिश्चित होगी।












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