छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती का आदेश वापस, निर्मला सीतारमण ने कहा- जारी रहेंगी पुरानी दरें
छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती का आदेश वापस, निर्मला सीतारमण ने कहा- जारी रहेंगी पुरानी दरें
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये जानकारी दी है कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में कटौती का आदेश वापस ले लिया गया है। अब लघु बचत योजनाओं यानी छोटी बचत की योजनाओं पर पुरानी ब्याज दरें ही जारी रहेंगी। निर्मला सीतारमण ने इस बात की जानकारी 01 अप्रैल की सुबह ट्वीट कर दी है। वित्त मंत्री ने बताया कि इस घोषणा को वापस लेने के साथ पुरानी दरें ही लागू रहेंगी। निर्मला सीतारमण ने ट्वीट किया, ''भारत सरकार की लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें पुरानी दरों पर बनी रहेंगी, जो वित्त वर्ष 2020-2021 की अंतिम तिमाही में मौजूद थीं। यानी मार्च 2021 की ब्याज दर ही आगे भी मिलेगी। पुराने आदेश वापस ले लिए जाएंगे।''

सरकार ने छोटी योजनाओं पर ब्याज दर में कटौती करने का लिया था फैसला
केंद्र सरकार ने बुधवार (31 मार्च) को छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटाने का फैसला लिया था। वित्त मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर बताया था कि छोटी योजनाओं (लघु बचत योजनाओं) पर ब्याज दर 1.10 फीसदी तक घटाई गई हैं। नई दरें एक अप्रैल 2021 से लागू हो जाएंगी। लेकिन अब इस आदेश को केंद्र सरकार ने वापस ले लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट कर कहा है कि छोटी बचत की योजनाओं पर पुरानी ब्याज दरें जारी रहेंगी।
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जानें छोटी डिपॉजिट्स पर कितनी हैं ब्याज दरें
केंद्र सरकार ने बुधवार (31 मार्च) को कई छोटी बचत योजनाओं पर जून तिमाही के लिए ब्याज दरों को लेकर कटौती की घोषणा की थी। जो इस प्रकार हैं, छोटी योजनाओं पर सलाना दर 4 प्रतिशत से घटाकर 3.5 % कर दिया गया था। पर्सनल प्रोविडेंट फंड( पीपीएफ) की ब्याज दर भी 7.1 प्रतिशत से घटाकर 6.4 % कर दिया गया था। एक साल की अवधि के जमा पर ब्याज दर को 5.5 फीसदी से कम करके 4.4 प्रतिशत कर दिया गया था। वरिष्ठ नागरिक जमा योजनाओं के लिए ब्याज दर 7.4 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया गया था।

जानिए सरकार ने क्यों वापस लिया आदेश?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर एक दिन पहले ही सरकार ने छोटी योजनाओं पर ब्याज दर में 1.10% तक कटौती करने का फैसला किया था और आज यानी एक अप्रैल को आदेश को वापस लेने की घोषणा क्यों की है? बता दें कि छोटी बचत की योजनाएं समाज के गरीब तबके, मिडिल क्लॉस और सैलरी बेस्ड लोगों के लिए काफी अहम है। ऐसे लोग छोटी बचत की योजनाओं में निवेश करते हैं। इन्ही लोगों को ध्यान में रखते हुए सरकार छोटी बचत की योजनाएं भी लाती हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा छोटी योजनाओं पर ब्याज दर कटौती के फैसले से पीपीएफ पर ब्याज दर 46 साल के न्यूनतम स्तर पर आ गया था। जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग मायूस था। सरकार इतने बड़े समाज के वर्ग को नुकसान नहीं पहुंचना चाहती है। इसके अलावा इसका असर छह राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता था।
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