सेना पर FIR: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आर्मी ऑफिसर के पिता, केस रद्द करने की मांग
याचिका में मांग की गई है आतंकी गतिविधियों और सरकारी सम्पतियों को नुकसान पहुचाने और केंद्रीय कर्मचारियों के जीवन को खतरे में डालने वाले लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में सेना पर दर्ज किए गए एफआईआर के मामले में आर्मी ऑफिसर के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी याचिका में जम्मू कश्मीर के शोपियां में 27 जनवरी को दर्ज किए गए एफआईर को रद्द करने की मांग की है। 10 गढ़वाल राइफल के मेजर आदित्य कुमार के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की रक्षा के लिए और जान की बाजी लगाने वाले भारतीय सेना के जवानों के मनोबल की रक्षा की जाए।

सेना पर दर्ज केस रद्द करने की मांग
लेफ्टिनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह के मुताबिक जिस तरीके से राज्य में राजनीतिक नेतृत्व द्वारा FIR दर्ज की गई और राज्य के उच्च प्रशासन को प्रोजेक्ट किया गया, इससे लगता है कि राज्य में विपरीत स्थिति है। ये उनके बेटे के लिए समानता के अधिकार और जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने इस मामले में उनके सैन्य अधिकारी बेटे को आरोपी बना कर मनमाने तरीके से काम किया है।

मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए
याचिका में मांग की गई है आतंकी गतिविधियों और सरकारी सम्पतियों को नुकसान पहुचाने और केंद्रीय कर्मचारियों के जीवन को खतरे में डालने वाले लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। राज्य सरकार को आर्मी के मामले में इस तरह के फैसले लेने से रोका जाए और ऐसी स्थिति में सैनिकों को बचाने के लिए गाइडलाइन बनाया जाए। ड्यूटी पर तैनात सेना के जवानों को इस तरह की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान किया जाए।

क्या है पूरा मामला
दरअसल 27 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के शोपियां में पत्थरबाजों पर सेना की फायरिंग में दो पत्थारबाजों की मौत हो गई थी। इस मामले को लेकर वहां काफी विरोध-प्रदर्शन हुए थे। इस फायरिंग का आदेश देने को लेकर मेजर आदित्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। राज्य सरकार की इस कार्रवाई को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। आपको बता दें कि सुरक्षाबलों को जम्मू-कश्मीर अफ्सपा के तहत विशेष अधिकार हासिल है और रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बिना कोई केस दायर नहीं कर सकता। मोदी सरकार भी इस मामले में लोगों के निशाने पर आ गई है।
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