कश्मीर को कभी भारत में नहीं मिलने देंगे, फारुख अब्दुल्ला का ऐलान

फारुख अब्दुल्ला के मुताबिक वह अपनी कब्र से भी धारा 370 की सुरक्षा के लिए आवाज उठाते रहेंगे। फारुख अब्दुल्ला के मुताबिक जब पिछले हफ्ते नरेंद्र मोदी ने जम्मू में एक रैली के दौरान यह कहा था कि वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के इंसानियत की नीति को आगे बढ़ाएंगे तो उन्होंने यह बात सिर्फ वोट हासिल करने के मकसद से कही थी। अब्दुल्ला का कहना है कि वह सिर्फ वोट हासिल करने के मकसद से वोटर्स को बरगला रहे थे।
अब्दुल्ला ने कार्यकर्ताओं के सामने दावा किया कि उन्होंने राज्य के स्वायत्त प्रावधान को खत्म करने से जुड़ी एक चिट्ठी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेई को भेजी थी। इन वरिष्ठ नेताओं ने इसे खारिज कर दिया। अब्दुल्ला ने दावा किया वाजपेई स्वायत्त दर्जे को खत्म करने के सख्त खिलाफ थे और उन्होंने रिपोर्ट को पढ़ा ही नहीं था। साल 2000 में जब फारुख अब्दुल्ला की सरकार राज्य में थी तो विधानसभा में एक रेजॉल्यूशन पास कर राज्य में साल 1953 वाली स्थिति को लागू कर दिया गया था।
वहीं दूसरी ओर फारुख अब्दुल्ला के इस बयान के कुछ घंटों बाद ही पीडीपी की अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती ने अब्दुल्ला को उनके बयान के लिए जमकर कोसा। मुफ्ती के मुताबिक राज्य को हासिल स्वायत्त दर्जे का मतलब है कि अब्दुल्ला की सरकार में राज्य में शासन करने की क्षमता हीं नहीं है। मुफ्ती का मानना था कि फारुख अब्दुल्ला और उनकी पार्टी को कश्मीर के लोगों के हितों से कोई मतलब ही नहीं है। मुफ्ती के मुताबिक नेशनल कांफ्रेंस वाजपेई की अगुवाई वाली एनडीए सरकार का हिस्सा थी लेकिन इसके बावजूद कश्मीर के लोगों के लिए कुछ भी नहीं किया गया।












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