धान की खेती पर मंडराया खतरा, LOCKDOWN के चलते किसानों ने लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में तीन मई तक लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। ऐसे में पंजाब और हरियाणा में किसानों के सामने बड़ी समस्या बड़ी हो गई है, जहां धान की रोपाई के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब और हरियाणा में धान की खेती के लिए दस लाख मजूदरों की जरूरत पड़ती है। इसमें से ज्यादातर मजदूर दूसरे राज्यों से आते हैं, जो अब लॉकडाउन की वजह से नहीं आ पा रहे। मजूदरों की कमी के चलते अब किसान धान की खेती छोड़कर कपास और मक्के की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

सस्ते में काम करते हैं मजदूर

सस्ते में काम करते हैं मजदूर

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब और हरियाणा में धान की रोपाई और कटाई में दस लाख मजदूर की जरूरत होती है। इसमें से ज्यादातर मजदूर यूपी बिहार के रहते हैं। पंजाब के मानसा जिले के किसान मंजीत सिंह सिद्धू ने बताया कि वो अपने 13 एकड़ जमीन में धान की खेती करते आ रहे थे, लेकिन इस साल मजदूर नहीं मिल पाएंगे। ऐसे में उन्होंने 11 एकड़ में कपास और बाकी के दो एकड़ में धान बैठाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि सरकार तीन मई के बाद लॉकडाउन हटा ले लेकिन मजदूरों के आने की कोई गारंटी नहीं है। स्थानीय मजदूर एक एकड़ में धान की रोपाई का 4500 से 5000 हजार रुपये लेते हैं, जबकि बाहर से आने वाले मजदूर इसी काम को 2500 रुपये में कर देते हैं।

मक्के और कपास की खेती कर रहे किसान

मक्के और कपास की खेती कर रहे किसान

वहीं अब किसान धान की बजाए मक्के और कपास की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इस खेती में मेहनत और लागत कम है। साथ ही बाजार में मक्के और कपास का दाम भी सही मिल जाता है। किसानों के मुताबिक धान की रोपाई हो भी जाएगी, तो उसके लिए ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है। वहीं कपास और मक्के में धान की अपेक्षा कम पानी लगता है। धान की कटाई के बाद पराली का निस्तारण एक अलग समस्या है। बढ़ते प्रदूषण के कारण पराली को जलाने पर रोक लगी हुई है। जिस वजह से उनके निस्तारण में भी उन्हें अच्छी खासी रकम खर्च करनी पड़ती है।

धान की खेती नहीं करने पर मिलेगा 2000

धान की खेती नहीं करने पर मिलेगा 2000

वहीं दूसरी ओर हरियाणा सरकार ने अब किसानों से धान की फसल नहीं बोने की अपील किया है। कृषि विभाग के मुताबिक जो किसान धान की खेती नहीं करेगा, उसको 2000 प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। धान में लगने वाले पानी की वजह से सरकरा ने ये फैसला लिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक धान नहीं लगाने वाले किसानों को पहले रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। जिस पर उन्हें 200 रुपये दिए जाएंगे। वहीं उसके बाद अधिकारी खेतों में जाकर जांच करेंगे फिर बाकी के 1800 रुपये किसानों के खाते में आ जाएंगे। वहीं मक्के और दाल की खेती बढ़ाने के लिए सरकार फ्री बीज बांटेगी।

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