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Farmers Protest: जानिए आखिर क्यों पंजाब के बाहर के किसानों के लिए MSP एक सपने जैसा है

FarmersProtest: कृषि कानूनों के खिलाफ बड़ी संख्या में किसान दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। तमाम किसान इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। कुछ किसान उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से भी पहुंच रहे हैं। इनमे से कई किसानों का कहना है कि उन्हें एमएसपी से कहीं कम कीमत पर फसल की कीमत मिली है। वहीं गन्ना किसानों को तो पूर साल तक भुगतान नहीं किया गया है। किसानों का कहना है कि जिनके पास दो एकड़ से कम के खेत है उन्हें बसे ज्यादा इस कानून से नुकसान होगा।

farmer

पैसों के लिए करना पड़ता है इंतजार

यूपी के पीलीभीत के ठकिया नाथा गांव के रहने वाले राम चंद का कहना है कि उन्हें एमएसपी से कम कीमत पर मजबूरन फसल बेचनी पड़ी, उन्हें याद नहीं कि आखिर कब उन्होंने अपनी फसल को एमएसपी पर बेचा था। रामचंद का कहना है कि मेरे पास पांच बीघा जमीन है, जहां मैं गेहूं, चावल और गन्ना बोता हूं। मुझे दो साल से गन्ने का भुगतान नहीं हुआ है। वहीं अन्य किसानों का कहना है कि हमारा सहकारी गन्ना विकास समिति के कॉन्ट्रैक्ट है जोकि उन्हें प्रति क्विंटल 325 रुपए का भुगतान करती है। जबकि एफआरपी यानि उचित मूल्य गन्ना का 285 रुपए प्रति क्विंटल तय है।

दो साल से नहीं हुआ भुगतान

रामचंद पिछले 10 दिनों से प्रदर्शन स्थल पर हैं, उनका कहना है कि मैं अभी भी अपनी बाकी की राशि के भुगतान का इंतजार कर रहा हूं। मुझे इस साल अपने बेटे की शादी और खेती के लिए 1.5 लाख रुपए के लोन की जरूरत है। अभी बाजार की यह हालत है जब सरकार एमएसपी वगैरह है, सोचिए जब प्राइवेट कॉर्पोरेट आएंगे तो क्या होगा, जब एमएसपी की गारंटी नहीं होगी तो क्या होगा। यही नहीं नए कानून के तहत वह कोर्ट नहीं जा पाएंगे और उन्हें एसडीएम के पास जाना होगा।

एमएसपी से कहीं कम मिलती है कीमत

गन्ना किसानों को भुगतान ना होने की समस्या उत्तराखंड के किसान भी उठाते आ रहे हैं। उत्तराखंड के मंदीप नरवाल का कहना है कि उन्हें भी दो साल से गन्ने का भुगतान नहीं हुआ है। मैं सिर्फ यही फसल उगाता हूं, मै प्रति वर्ष 800 क्विंटल गन्ना उगाता हूं, लेकिन मुझे एक भी रुपए नहीं मिले हैं, मैं स्थानी संस्थाओं से लोन लेकर गुजर बसर कर रहा हूं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इसके अलावा कुछ उगा सकते हैं तो उनका कहना है कि जो लोग धान उगाते हैं उनकी भी हालत कुछ खास नहीं है। बता दें कि गेंहूं की एमएसपी 1868 रुपए प्रति कुंटल है जबकि प्रदर्शन में शामिल एक किसान का कहना है कि उसमे मजबूरन 1200 रुपए पर इसे बेचना पड़ता है।

नया कानून पर खड़े किए सवाल

किसानों का कहना है कि अगर एमएसपी और आढ़ती को हटा दें तो उन्हें इससे भी कम कीमत पर अनाज बेचना पड़ेगा। पूर लाल जोकि पीलीभीत के रहने वाले हैं उनका कहना है कि पिछले सीजन में उनके पास 4 कुंटल धान था, जिससे उन्हें 400 रुपए मिले, जिसमे से 2000 रुपए उन्होंने गेहूं की फसल बोने में लगा दिए, मजदूरों को पैसा देने के बाद उनके पास पूरे छह महीने के लिए सिर्फ 600 रुपए बचे हैं। अगर में अगर कोई बीमार हो जाए, तो मैं कुछ नहीं कर सकता हूं। घर में चार बच्चे हैं वह सरकारी स्कूल जाते हैं वहां मिड डे मील तो मिलता है लेकिन पढ़ाई कुछ नहीं होती है। अगर मुझे एममएसपी मिलती तो मैं अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल भेजता, मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चे भी मेरी तरह से परेशान रहे।

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