किसान आज से भूख हड़ताल पर, मोदी सरकार ने फिर से भेजा बातचीत का न्योता
Farmers Protest Latest Update: खेती से जुड़े नए कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने सोमवार से भूख हड़ताल का ऐलान किया है। किसान संगठनों ने बताया है कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग के साथ एक दिवसीय रिले भूख हड़ताल की जाएगी। इसके तहत 24 घंटे के लिए, 12 किसान यूनियनों का एक समूह भूख हड़ताल पर जाएगा। 24 घंटे के बाद, 11 किसान यूनियनों का एक और समूह भूख हड़ताल शुरू करेगा।
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मोदी सरकार ने संसद के मानसून सत्र में काफी हंगामे के बाद तीन नए कृषि कानून पास करवाए थे। सरकार का दावा है कि ये कानून किसानों की बड़ी समस्याओं का हल हैं, जबकि किसान नेताओं का आरोप है कि कॉर्पोरेट जगत को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ये कानून लेकर आई है। इसी वजह से वो 25 दिनों से दिल्ली से लगती सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही सोमवार (आज) से उन्होंने भूख हड़ताल का ऐलान किया है। जिस वजह से सरकार ने फिर से उन्हें बातचीत का न्योता दिया है।
दरअसल सरकार किसान आंदोलन को जल्द से जल्द खत्म करवाना चाहती है। पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने भी कई बार किसानों की हर बात सुनने की बात कही है। जिस वजह से एक बार फिर सरकार ने आंदोलनकारी किसानों को बातचीत का प्रस्ताव भेजा है। इस संबंध में कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने क्रांतिकारी किसान मोर्चा समेत 40 किसान संगठनों को चिट्ठी लिखी है।
योगेंद्र यादव ने कही ये बात
सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान योगेंद्र यादव ने कहा कि सोमवार से सभी प्रदर्शन स्थलों पर किसान एक दिन की क्रमिक भूख हड़ताल करेंगे। इसकी शुरूआत प्रदर्शन स्थलों पर 11 सदस्यों का एक दल करेगा। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के दौरान किसानों से थाली बजाने की अपील की। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाला के मुताबिक 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा के सभी टोल प्लाजा पर वो वसूली नहीं करने देंगे।
कृषि मंत्री की चिट्ठी पर पलटवार
वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को आठ पन्नों का खुला पत्र लिखा था, जिसके बाद पीएम मोदी ने भी किसानों से अपील की थी कि वो इस खत को जरूर पढ़ें क्योंकि ये कानून उनके खिलाफ नहीं है। जिस पर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने पलटवार किया है। एआईकेएससीसी ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनके द्वारा कही गई हर बात तथ्यहीन है। यह कहना दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों के मुद्दों को हल करने की कोशिश में, पिछले दो दिनों में आपने किसानों की मांगों और उनके विरोध पर जो हमला किया है, वह बताता है कि किसानों के साथ आपको कोई सहानुभूति नहीं है।












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