दावोस में रेड कारपेट बिछाने से कुछ नहीं होने वाला, पीएम मोदी की नीतियों पर फरीद जकारिया की खरी-खरी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में दावोस से लौटे हैं। वहां वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में उनके भाषण की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। दावोस में पीएम मोदी ने न केवल भारतीय मूल्यों पर बल दिया बल्कि पूरी दुनिया को यह कहते हुए भारत आने का न्योता दिया कि हमारे यहां अब रेड टेप नहीं, रेड कारपेट है। पीएम मोदी के इस भाषण पर अब अमेरिकी पत्रकार फरीद जकारिया की प्रतिक्रिया आई है। फरीद जकारिया वही पत्रकार हैं, जिन्होंने पीएम बनने के बाद सबसे पहले नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लिया था। फरीद जकारिया ने इंडिया टुडे के साथ बातचीत में कई कड़ी टिप्पणियां की हैं। उनका मानना है कि पीएम मोदी दावोस जैसे मंच से दुनिया को संदेश देने में न केवल रणनीतिक चूक कर गए बल्कि 'रेड टेप की जगह रेड कारपेट' के दावे पर भी जकारिया ने सवाल उठाए हैं। जकारिया की कही बातें इसलिए भी ज्यादा अहम हो जाती हैं, क्योंकि वह अमेरिकी सरकार में अच्छी पैठ रखते हैं और वहां के कारोबारियों में भारत के बारे में बन रही राय को अच्छे से समझते हैं। जकारिया का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने दावोस में जो बातें कहीं, वो अच्छी तो हैं, लेकिन हकीकत बिल्कुल वैसी नहीं है। आइए जानते हैं जकारिया ने पीएम मोदी और उनकी सरकार की नीतियों के बारे में क्या क्या बातें कहीं।

जकारिया बोले- दावोस में रेड कारपेट बिछाने से कुछ नहीं होगा
क्या दावोस में पीएम मोदी के भाषण के बाद भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा? इस सवाल के जवाब में फरीद जकारिया ने कहा कि पीएम मोदी बिजनेस को लेकर बेहद खुले विचारों के हैं और उन्होंने कई सुधार भी किए हैं, लेकिन भारत में निवेश को लेकर आज भी स्थिति अनुकूल नहीं हैं। विदेशी निवेशक आज भी नौकरशाही, लाइसेंस राज को लेकर चिंता में रहते हैं। जकारिया ने कहा कि सिर्फ दावोस में रेड कारपेट बिछाने से कुछ नहीं होगा, बल्कि जमीन पर बदलाव लाना होगा। दावोस में पीएम मोदी के भाषण को जकारिया ने अच्छी पहल तो माना, लेकिन उनका मानना है कि वह दुनिया को संदेश देने में रणनीतिक चूक कर गए।

मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर उठाए सवाल
फरीद जकारिया ने मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को दीर्घकालिक रणनीति बनाने की जरूरत है। भारत को समझना होगा कि आखिर उसकी प्रायोरिटी क्या है? उसे सबसे पहले यह फैसला करना चाहिए कि उसे ग्लोबल लीडर बनना है विकास पर फोकस करना है।

चीन के मुकाबले अभी मजबूत नहीं है भारत की स्थिति
फरीद जकारिया चीन के साथ भारत की तुलना पर कहा कि भारत को एशिया के लिए अपनी रणनीति बनानी चाहिए। आर्थिक विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चीन के मुकाबले भारत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है, जबकि उसकी क्षमता चीन से ज्यादा है। उन्होंने चीन और रूस का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन लगातार अर्थव्यवस्था पर फोकस कर रहा है, लेकिन विदेश नीति पर उसका ज्यादा फोकस नहीं है। वहीं, दूसरी ओर रूस का रवैया एकदम अलग है, उसका ध्यान विकास पर नहीं है, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में वह दखल का कोई मौका नहीं छोड़ता है।












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