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Jyoti Mishra: फर्जी निकली ज्योति मिश्रा की IFS अफसर की कहानी, दिल्ली में रहकर बताती थी स्पेन का पता

Fake IFS Officer Jyoti Mishra: ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर को लेकर एक के बाद एक कई खुलासे हुए हैं। जिसमें फर्जी सर्टिफिकेट को लेकर भी विवाद सामने आया है। इसी कांड के सामने आने के बाद अब एक के बाद एक कई यूपीएससी में चयनित अधिकारियों के सार्टिफिकेट को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसा आरोप है कि, कई अधिकारियों ने गलत तरीके के ईडब्ल्यूए, समेत कई फेक प्रमाणपत्र बनवाकर गलत तरीके से रिजर्वेशन का लाभ लिया है।

इसी बीच अब फर्जी आईएफएस ज्योति मिश्रा की कहानी सामने आने के बाद नया हंगामा खड़ा हो गया है। आरोप है कि ज्योति 'मिश्रा' ने अनुसूचित जाति की आरक्षित सीट से यूपीएससी की परीक्षा पास की। जबकि वह जनरल कैटागरी से आती हैं। जिसके बाद ज्योति मिश्रा ने ट्वीट कर इस मामले पर सफाई दी थी।

Truth Behind Jyoti Mishra s Alleged Fake IFS Claims Uncovered

ज्योति मिश्रा के नाम से बने एक एक्स हैंडल लिखा गया था कि, वायरल हो रही लिस्ट में जिस ज्योति का नाम है, वो दरअसल एक दूसरी लड़की है जो हरियाणा से है और वो आईएएस है। साथ ही ये भी लिखा है कि उन्होंने (ज्योति मिश्रा ने) सामान्य श्रेणी से ही यूपीएससी की परीक्षा पास की है। पोस्ट के मुताबिक, उनका चयन आईएएस नहीं, बल्कि आईएफएस में हुआ था और उनका नाम एक दूसरी लिस्ट में आया था।

ज्योति का फर्जीवाड़ा-

इसके बाद ज्योति मिश्रा की तरफ से एक और स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें लिखा गया कि ज्योति रायबरेली की रहने वाली हैं। वो इंडियन फॉरेन सर्विस की अधिकारी हैं और फिलहाल प्रोबेशन पर स्पेन की राजधानी मैड्रिड में बतौर थर्ड सेक्रेटरी पोस्टेड हैं। जिसके बाद अब इस मामले में भी एक खुलासा हुआ है। ज्योति मिश्रा जो दावा कर रही थीं, वह भी फर्जी निकला है।

दरअसल वह आईएफएस अधिकारी है ही नहीं, जैसा कि मंगलवार तक लोग मानते आ रहे थे और ना ही उसने कभी मैड्रिड स्थित भारतीय दूतावास में काम किया है। इतना ही नहीं वह कभी सिविल सेवा परीक्षा को पास ही नहीं कर पाई थीं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, ज्योति मिश्रा ने कबूल किया कि, सिविल सर्विसेज पास करने के लिए उनके माता-पिता की ओर से कोई दबाव नहीं था, लेकिन उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि, उनके साथियों में से पांच ने यूपीएससी परीक्षा पास कर ली, लेकिन वह अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हो पाईं।

पिता को मालूम था कि, बेटी स्पेन में है, लेकिन....

जब समाचार पत्र ने लखनऊ में कार्यरत उसके पिता से उनका और उनकी बेटी का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि उनकी बेटी मैड्रिड में भारतीय दूतावास में तैनात है और वार्किंग टाईम के बाद (भारतीय समयानुसार रात 10 बजे) उससे संपर्क किया जा सकता है।

जब समाचार पत्र ने व्हाट्सएप के जरिए ज्योति मिश्रा को कॉल किया, तो उन्होंने अपनी एक्स पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। उन्होंने कहा कि, "मुझे अपने और अपने करियर के खिलाफ कई भ्रामक जानकारी मिली हैं। इसलिए मैं एक बार उन सभी लोगों को यह स्पष्ट करना चाहती हूं जो जानबूझकर या अनजाने में मुझे निशाना बना रहे हैं। जिस पोस्ट में ज्योति का नाम एससी और आईएएस बताया गया है, वह मैं नहीं हूं। वह आईएएस हैं और हरियाणा जिले से हैं। मैं आईएएस नहीं हूं। मुझे आईएफएस कैडर मिला है और मेरा नाम दूसरी सूची में था।

ज्योति ने दिखाए फर्जी दस्तावेज-
ज्योति मिश्रा ने सबूत के तौर पर कई दस्तावेज़ साझा किए। जिसमें एक राजनयिक पासपोर्ट, यूपीएससी से उनके चयन और मैड्रिड में बाद की पोस्टिंग के बारे में एक पत्र, और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) का एक आईडी कार्ड। जिसके बाद टीओआई ने उनके दावों की पुष्टि के लिए मेड्रिड के भारतीय दूतावास संपर्क किया।

मंगलवार को मैड्रिड स्थित भारतीय दूतावास में प्रेस सूचना और संस्कृति को संभालने वाले सचिव अमन चंद्रन ने ज्योति मिश्रा लेकर कई अहम जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि इस दूतावास में उनके नाम का कोई अधिकारी काम नहीं कर रहा है। इसके बाद जब इस मामले की गहराई से खोजबीन की तो पता चला कि वह दिल्ली में रहती हैं। समाचार पत्र ने जब ज्योति से गहराई से बात की तो उन्होंने फर्जीवाड़े की बात कबूल कर ली।

ज्योति ने कभी पास नहीं की सिविल की परीक्षा-

ज्योति ने बताया कि, मैंने कभी भी कोई यूपीएससी परीक्षा पास नहीं की है। सिविल सेवा परीक्षा 2021-सेवा आवंटन सूची की नकली पीडीएफ की प्रति, जिसे उसके पिता सुरेश नारायण मिश्रा ने शेयर किया था, उसके अनुसार ज्योति मिश्रा को रोल नंबर 5904317 के साथ सामान्य श्रेणी के तहत 432 रैंक आवंटित की गई है। जबकि असली सूची में वास्तविक सूची में आरक्षित एससी श्रेणी की ज्योति को 432वां स्थान दिया गया है, जिनका रोल नंबर 843910 है।

ज्योति दो साल तक इस फर्जीवाडे को केवल इसलिए मैनेज कर पाई क्योंकि ज्योति केवल अपने माता-पिता को धोखा दे रही थी, किसी और को नहीं। वे अपनी बेटी पर इसलिए भी विश्वास कर रहे थे, क्योंकि ज्योति शुरू से पढ़ाई में अच्छी रही थी। वह अपने माता-पिता से बहुत कम मिलने जाती थी। वह आखिरी बार डेढ़ महीने पहले 'मैड्रिड से' उनके पास गई थी।

यूपी पुलिस ने भी दी थी बधाई-
बता दें कि , 2022 में यूपी पुलिस ने उन्हें अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से बधाई भी दी थी। उन्हें कई कार्यक्रमों में बुलाकर इस कथित सफलता के लिए सम्मानित भी किया गया था।

ज्योति के फर्जीवाडे की जानकारी जब उनके पिता को हुई तो वह हैरान रह गए। उनका कहना था कि, आज तक, मुझे विश्वास था कि मेरी बेटी मैड्रिड स्थित भारतीय दूतावास से जुड़ी एक आईएफएस अधिकारी है। मुझे समझ नहीं आता कि उसे हमसे झूठ क्यों बोलना पड़ा। हमने उस पर कभी किसी बात के लिए दबाव नहीं डाला। वह पढ़ाई में अच्छी थी। मुझे नहीं पता कि वह इस समय दुनिया में कहां रह रही है, लेकिन मैं चाहता हूं कि वह घर लौट आए।

ज्योति फिलहाल दिल्ली में एक अर्ध सरकारी कंपनी में नौकरी कर रही हैं। उन्हें इतने पैसे मिल जाते हैं कि उनका खर्चा-पानी चल जाता है और उन्हें घर से पैसे नहीं मांगने पड़ते।

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