Fact check: क्या अब नगर निगम की सीमाओं में हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं रहा? जानें सच
Fact check: सोशल मीडिया पर आए दिन कोई ना कोई गलत दावे के साथ मैसेज वायरल होते रहते हैं। इन दिनों ऐसा ही एक रोड सेफ्टी से जुड़ा मैसेज वायरल हो रहा है। मैसेज में दावा किया गया है कि, कोर्ट ने महानगर पालिका के दायरे में दोपहिया वाहन चालक को हेलमेट पहनने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। लोगों पर शहर के अंदर हेलमेट ना पहनने पर जुर्माना नहीं होगा।

व्हाट्सऐप पर वायरल हो रहे मैसेज में कहा गया कि, ब्रेकिंग न्यूज़ 'हेलमेट मुक्त' अब सभी राज्यों में अभी तक की जो हेलमेट चेकिंग चल रही थी उसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है ,सागर कुमार जैन के याचिका के मुताबिक महानगरपालिका की दायरों के अंदर हेलमेट का उपयोग वाहन चालक पर अनिवार्य नहीं होगा जिस रास्ते को राज्य मार्ग या हाईवे का दर्जा प्राप्त हुआ है वहां पर हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा।
मैसेज में आगे दावा किया गया है कि, इसके बाद अगर कोई भी ट्रैफिक वाला या कोई पुलिस वाला आपसे हेलमेट क्यों नहीं पहना पूछता है तो आप उसे कह सकते हो कि मैं महानगरपालिका नगरपालिका पंचायत समिति शहर के हद में हूं आप सभी को यह जानकर खुशी होगी। इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि लोगों को भी पता चले ...!!" इस वायरल हो रहे मैसेज के साथ एक वकील का नंबर और नाम भी शेयर किया है।

वन इंडिया की फैक्ट चेक टीम ने वायरल हो रहे मैसेज की पड़ताल की तो ये दावा फर्जी साबित हुआ। इससे अलावा भारत सरकार के सूचना प्रसारण ब्यूरो की फैक्ट चेक टीम ने इस वायरल मैसेज को लेकर जानकारी साझा की है। पीआईबी ने ट्वीट कर लिखा कि, वायरल हो रहे एक फर्जी मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सभी राज्यों में दुपहिया चालकों की हेलमेट चेकिंग को खारिज कर दिया गया है। भारत सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है।
इसके आलाव वायरल हो रहे मैसेज को लेकर जब हमने इससे जुड़ी खबरों को खंगाला तो हमे ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली। यहां तक कि इस संबंध में जब एक पुलिस अधिकारी से बात की तो उन्होंने कहा कि, उन्हें ऐसा कोई मैसेज या आदेश नहीं मिला है। जिसमें शहर के अंदर होने वाली चैकिंग को रोकने के लिए कहा गया हो। उनका कहना है कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेल्मेट अनिवार्य है। यह लोगों की सुरक्षा के लिए है। हेलमेट नहीं लगाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा हमने मैसेज में दिए गए मोबाइल नंबर पर बात की। यह नंबर देवेन्द्र प्रताप सिंह चौहान का ही है। उन्होंने कहा, 'यह पोस्ट पहले भी कई बार वायरल हो चुकी है। वायरल पोस्ट फर्जी है। लोग गलत जानकारी शेयर कर रहे हैं। इस संबंध में उनके पास कई फोन आ चुके हैं और वह इससे परेशान हो चुके हैं। उन्होंने इस संबंध में समाचर पत्र में छपी खबर की जानकारी भी दी। जिसमें लिखा गया था कि, उनके खिलाफ किसी ने साजिश के तहत ये मैसेज वायरल किया था।












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