IIMs ने सरकार से पत्र लिखकर की गुजारिश, कहा- हमें नौकरी में आरक्षण से मुक्ति दें
नई दिल्ली। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIMs) ने सामूहिक रूप से केंद्र सरकार को एक पत्र लिखते हुए आरक्षण से छूट दिए जाने की मांग की है। 20 IIMs ने इस पत्र में कहा है कि संस्थानों को फैकल्टी के पदों पर भर्ती में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण से छूट दी जाए। ये पत्र बीते सप्ताह मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय को लिखा गया है।
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इन्होंने केंद्र से मांग की गई है कि इन्हें भी केंद्र सरकार की तरफ से अधिसूचित केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (रिजर्वेशन इन टीचर कैडर्स) एक्ट 2019 में वर्णित इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सिलेंस में शामिल किया जाए। बता दें एक्ट का सेक्शन 4 इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सिलेंस, शोध संस्थानों, राष्ट्रीय और सामरिक महत्व के संस्थानों और अल्पसंख्यक संस्थानों को आरक्षण देने से छूट प्रदान करता है।
वर्तमान में केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (रिजर्वेशन इन टीचर कैडर्स) एक्ट 2019 के सेक्शन 4 के तहत टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर, नॉर्थ-ईस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंस, जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च, फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्री, स्पेस फिजिक्स लैबोरेट्री, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग और होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट और इनकी 10 इकाइयां आती हैं।
मीडिया रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है कि चूंकि इसमें आरक्षण से छूट है, तो आईआईएम की तरफ से इस आशय का आग्रह किया गया है। IIMs ने तर्क देते हुए कहा है कि इनकी भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष है और इसी प्रक्रिया के तहत वंचित वर्गों को भी नौकरी पर रखने का प्रयास किया जा रहा है।
पत्र में संस्थानों ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आरक्षण एक तरीका नहीं हो सकता है। बता दें मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो देशभर के 20 IIMs में मौजूदा फैकल्टी में से करीब 90 फीसदी सामान्य वर्ग से संबंधित है। ये मांग सरकार के उस निर्देश पर आई है जिसमें फैकल्टी पदों पर नौकरियों में एससी, एसटी, ओबीसी और आर्थिक रूप से वंचित वर्ग के लोगों को भी आरक्षण का लाभ दिए जाने की बात कही गई है।












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