निठारी के दरिंदे सुरेंद्र कोली की फांसी टलने से निराश हुआ जल्लाद

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक बेहद अहम फैसले में निठारी कांड के गुनहगार सुरेन्द्र की मौत की सज़ा को फांसी में तबदील करने के बाद अब सवाल पूछा जा रहा है कि मेरठ जेल में उसकी फांसी की तैयारियों का क्या होगा। उसको फांसी देने के लिए मेरठ जेल में एक सांकेतिक फांसी भी दी गई थी। कोली की फांसी की सज़ा माफ होने से पवन जल्लाद बहुत निराश होगा। उसे अब मानदेय नहीं मिलेगा जो फांसी देने पर मिलता।

तैयार था फांसी घर

गाजियाबाद की डासना जेल में कैद सुरेंद्र कोली को फांसी मुकर्रर होने के बाद मेरठ के फांसीघर को तैयार कर लिया गया था। फांसी पवन जल्लाद को मेरठ जेल में देनी थी। अगर उसे फांसी होती तो मेरठ जेल में करीब 40 साल के बाद किसी को फांसी दी जाती।

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जानकारी के मुताबिक, मेरठ जेल के फांसी घर में जेल के चुनिंदा अफसरों की मौजूदगी में फंदे और चैंबर को चेक किया गया था। तख्त और एंगल की मरम्मत भी कराई गई थी। यही नहीं पवन जल्लाद ने फांसी का ट्रायल भी कर लिया था। उस वक्त पवन जल्लाद के मन में एक खुशी भी थी कि वो उस व्यक्त‍ि को फांसी देने जा रहा है, जिसने मासूम बच्च‍ियों की हत्या कर शवों के साथ बलात्कार किया।

देश हिला दिया था

आपको याद होगा कि निठारी कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। 2006 के निठारी कांड में मुख्य आरोपी रहे मोनिंदर सिंह पंधेर के नौकर सुरेंद्र कोली को सीबीआई कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी।

1975 में आखिरी फांसी

मेरठ जेल में अंतिम फांसी जुलाई 1975 में दी गई थी। इसलिए फांसी घर खंडहर जैसी हालत में था। तख्ते, एंगल और फांसी के लिए 15 मीटर की रस्सी का इंतजाम कर फांसी घर तैयार हो चुका था। फांसी से तीन दिन पहले ही सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में शिफ्ट किया जाना था।

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