तिहाड़ में बंद सुब्रत रॉय का केस लड़ रहे वकील की फीस 25 लाख प्रति दिन

Exclusive: Sahara group spending huge money on lawyers for Subrata Roy
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। सहारा इंडिया के चेयरमैन सुब्रत राय सहारा को तिहाड़ जेल से रिहा करवाने के लिए सहारा ग्रप ने एक से बढ़कर एक वकीलों की सेवाएं लेकर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए हैं। अब सहारा ग्रुप ने देश के चोटी के वकील हरीश साल्वे की सेवाएं लेने का फैसला किया है। अब वे सहाराश्री को रिहा करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेंगे।

हरीश साल्वे सबसे महंगे वकील

हरीश साल्वे को देश का इस समय सबसे तेज-तर्रार वकील माना जाता है। जानकारों का कहना है कि उनकी एक दिन की फीस 25 लाख रुपये है। उन्होंने अंबानी बंधुओं के बीच उठे विवाद के दौरान मुकेश अंबानी के पक्ष में सफलतापूर्वक पैरवी की थी।

सहारा ग्रुप हरीश साल्वे से पहले राम जेठमलानी, केटीएस तुलसी, राजीव धवन, अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नामचीन और महंगे वकीलों की सेवाएं चे चुका हैँ। केन्द्र में एनडीए सरकार के गठन से पहले रवि शंकर प्रसाद ने भी सहाराश्री के पक्ष में पैरवी की थी। एनडीए सरकार बनने के बाद तो वे केन्द्रीय विधि मंत्री बन गए।

सुप्रीम कोर्ट के एक आला वकील ने बताया कि सहारा ग्रुप अपने सहाराश्री की रिहाई के लिए वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च कर चुका होगा। क्योंकि सहारा ने जिन भी वकीलों को पैरवी के लिए अपने साथ जोड़ा वे साथ हर रोज 15-20 लाख रुपये लेते हैं।

सहारा ग्रुप में हताशा

इस बीच, सहारा ग्रुप के एक आला अधिकारी ने कहा कि सहाराश्री के जेल में जाने के बाद से समूह में बेहद निराशा और हताशा का माहौल है। कहीं किसी तरह का उत्साह नहीं है।

कर्मचारियों के माथे पर चिंता की लकीरें

सहारा के लगभग सभी कर्मचारियों के माथे पर इस वक्त चिंता की लकीरें बनी हुई हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि वो जहां भी जाते हैं, लोग उनसे एक ही बात कहते हैं, "अब सहारा डूब जायेगी!" जाहिर है अगर आपकी कंपनी के डूबने की बात बार-बार की जाये, तो आपको भी ऐसा लगने लगेगा कि आप उस जहाज पर सवार हैं, जो जल्द डूब सकता है।

मार्केट में लग रहे औने-पौने दाम

दिल्ली में सहारा इंडिया में कार्यरत एक एमबीए डिग्री धारक कर्मचारी (नाम नहीं ले सकते) ने बताया कि वो फंसे हुए महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में वो करीब आधा दर्जन कंपनियों में नौकरी के लिये आवेदन कर चुके हैं। अन्य कंपनियां औने-पौने दाम लगाकर कम सैलरी में राजी हो रही हैं। मुझे ऐसा लगता है कि वो अन्य कंपनियां मेरी मजबूरी का फायदा उठाने के लिए ऐसा कर रही हैं।

कर्मचारियों से फिर मांगे जा सकते हैं पैसे

हमने सहारा के लखनऊ में रहने वाले एक कर्मचारी (नाम नहीं ले सकते) को बताया कि उनके चेयरमैन को रिहा करवाने के लिये सहारा समूह वकील को 25 लाख रुपए प्रति दिन की फीस देने तक के लिये तैयार है, तो कर्मचारी ने कहा, "हो न हो ये पैसा भी हमारी ही जेब से निकाला जायेगा। कंपनी पहले ही फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में काफी पैसा ले चुकी है।"

कर्मचारी ने बताया कि सभी कर्मचारियों से फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में पैसा लिया गया है, जिसके लिये कंपनी ने वादा किया है कि सब कुछ दुरुस्त होने के बाद कर्मचारियों का पैसा सूद समेत लौटा दिया जायेगा।

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