तालिबान के चंगुल से बचकर आए बबलू की आपबीती, 5 दिन तक कमरे में छुपा रहा,फोन छीन लिए, लगा मौत सामने है

तालिबान के चंगुल से बचकर आए बबलू की आपबीती, 5 दिन तक कमरे में छुपा रहा,फोन छीन लिए, लगा मौत सामने हैं

नई दिल्ली। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां हालात बिगड़ गए हैं। तालिबान द्वारा तख्तापटल किए जाने के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल है। लोग खौफ से माहौल से किसी भी तरह से बचकर निकल जाना चाहते हैं। एयरपोर्ट की ऐसी तस्वीरें और वीडियोज सामने आए हैं, जिसे देखकर आपकी रूह कांप जाएगी। तालिबान के खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग विमान के पहिए पर लटककर अफगानिस्तान से बाहर निकल जाना चाहते हैं। सैकड़ों भारतीय भी वहां फंसे हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश जारी है। भारत सरकार लगातार हालात पर नजरें बनाए हैं। वहीं कई भारतीयों अफगानिस्तान से सुरक्षित निकाल लिया गया है। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान से बचकर निकालने झारखंड के रहने वाले बबलू कुमार ने वनइंडिया से खास बातचीत की और तालिबान के खौफ की कहानी बयां की।

 Exclusive: Jharkhand Man Bablu Kumar who return from Afghanistan, explain the real face of Taliban fighter

बबलू की आवाज जिस तरह से लड़खड़ा रही थी, उससे उनके मन में बैठे उस खौफ और डर का अंदाजा लगाना कठिन नहीं था। अफगानिस्तान में हालात बिगड़ता देख बबलू ने 16 अगस्त की टिकट ले ली, लेकिन वो इस सफर को तय नहीं कर सकें। फैक्ट्री से काबुल एयरपोर्ट पहुंचने के लिए बबलू अपने दो और साथियों के साथ निकलें, लेकिन हालात बिगड़ता देख उन्हें फैक्ट्री के फॉर्म हाउस में छिपकर जान बचानी पड़ी। बबलू ने बताया कि तालिबानियों ने फैक्ट्री के फॉर्म हाउस को भी अपने कब्जे में कर लिया था। तालिबानी लड़ाकों से बचते हुए किसी तरह से वो होटल पहुंचें, जहां सारे भारतीय जमा हो रहे थे। यहीं से उन्हें भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन तालिबानी लड़ाके वहां भी पहुंच गए। उन्होंने बबलू और उनके साथियों से मोबाइल फोन छीन लिए, उनके पासपोर्ट , जॉब कार्ड ले लिए और उन्हें वहां बंद कर दिया। 5 दिन तक ऐसा ही चलता रहा। गोलियों की आवाज दिन-रात चलती रही। तालिबान के लड़ाकों ने उनके साथियों के साथ मारपीट भी की। बिना खाना-पानी के ये लोग वतन वापसी की दुआ मांग रहे थे।

बबलू ने बताया कि एक वक्त तो लगा कि अब वापस नहीं लौट पाएंगे। सारी उम्मीदें खत्म हो गई थीं, लेकिन भारत सरकार की कोशिशों पर भरोसा था। जिस होटल में इन्हें बंद रखा गया वहां से कई बार उन्होंने कोशिश की काबुल एयरपोर्ट तक पहुंचने की। लगातार हो रही गोलाबारी और आसमानी फायरिंग के बीच जान जोखिम डालकर कई कोशिशें की एयरपोर्ट के बीच घुसने की, लेकिन सफल नहीं हो सके। होटल से एयरपोर्ट की दूरी महज 10 मिनट की थी, लेकिन इसे तय करने में उन्हें 28 से 30 घंटे लग गए। बस की सीट के नीचे कई घंटों तक बैठे रहे। न कुछ खाने तो था न पीने को। भूखे प्यारे बस किसी तरह एयरपोर्ट के भीतर पहुंचने की कोशिश जारी थी।

बबलू ने काबुल एयरपोर्ट की जो आंखों देखा हाल बताया वो हैरान कर देने वाला था। लाखों की तादात में लोग एयरपोर्ट के बाहर जमा हैं। लोग एयरपोर्ट की दीवार को लांघकर भीतर घुसने की कोशिश कर रहे थे। महिलाएं एयरपोर्ट की चारदिवारी पर लगे कांटेदार जालों के ऊपर से अपने बच्चों को फेंक रही हैं ताकि कोई उन्हें बचाकर अफगानिस्तान से बाहर ले जाए। ये बताते हुए बबलू का गला भर गया। उन्होंने कहा जब एयरपोर्ट के भीतर घुसा तो लगा कि शायद अब बच जाउंगा। बबलू बार-बार कहते रहे कि अफगानिस्तान के हालात और बिगड़ने वाले हैं। उन्होंने कहा कि रोजीरोटी की तलाश में वो अफगानिस्तान पहुंचें थे, लेकिन अब वहां के हाल को देखकर लग रहा है कि कभी वहां नहीं जाउंगा।

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