2,106 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद तेजस में नहीं धड़केगा 'देसी दिल'
बेंगलुरु। भारत का पहला लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (एलसीए) जो अब फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (एफओसी) मिलने का इंतजार कर रहा है, उसमें धड़कने के लिए जिस दिल का निर्माण डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) कर रहा था, अब उसने इसे बंद करने का फैसला कर लिया है।

टूट गया सपना
कावेरी इंजन (जीटीएक्स-35वीएस) प्रोग्राम को डीआरडीओ के देखरेख में चलाया जा रहा था, अब इसके बंद होने के साथ ही पहले देसी एयरक्राफ्ट में देसी इंजन का सपना भी टूट गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से वनइंडिया को इस बारे में जानकारी दी गई है।
डीआरडीओ की ओर से हाल ही में बेंगलुरु स्थित गैस टर्बाइन रिसर्च इस्टैब्लिशमेंट ( जीटीआरई ) की ओर से कावेरी इंजन को डेवलपमेंट को बंद करने से जुड़ी एक फाइल भेजी गई है।
अब इस प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की ओर से मंजूरी मिलने का इंतजार है और कैबिनेट की सिक्योरिटी कमेटी की ओर से पहले ही इस पर मंजूरी दी जा चुकी है। इस पूरी प्रक्रिया में फिलहाल एक वर्ष का समय लगेगा।
क्या है कावेरी प्रोजेक्ट
कावेरी प्रोजेक्ट की शुरुआत 80 के दशक के मध्य में हुई थी और इसका मकसद तेजस को ताकत देना था। जीटीआरई की ओर से अब तक इस पूरे प्रोजेक्ट पर 2,106 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
इस प्रोजेक्ट को रूस के आईएल-76 जिसे गजराज के नाम से भी जानते हैं उसके साथ टेस्ट किया गया था। सिर्फ 73 घंटे की ही फ्लाइट इंजन की वजह से पूरी हो सकी थी।
इस प्रोजेक्ट में होती देर की वजह से डीआरडीओ ने फैसला किया है कि वह अमेरिकन इंजन जीई 404 को तेजस एमके-1 और जीई 414 को तेजस एमके-11 के लिए इंस्टॉल करेगी।
डीआरडीओ का साहसिक फैसला
इस पूरे मसले पर ज्यादा जानकारी देने से साफ इंकार करते हुए डीआरडीओ के महानिदेशक डॉक्टर के तमिलमनी ने इस बात की पुष्टि की है अब कावेरी प्रोजेक्ट को बंद किया जा रहा है। वनइंडिया के साथ बातचीत में उन्होंने बताया, 'हां और यह फैसला डीआरडीओ की ओर से लिए गए कुछ हिम्मती फैसलों का हिस्सा बन गयस है। जब हमें लगा कि प्रोजेक्ट काफी लंबा हो रहा है और इसका कोई हल भी नहीं निकल रहा है तो यही बेहतर लगा। यह ईमानदार फैसला है।'
डिप्लोमैटिक अंदाज में स्वीकारी गलतियां
नरेंद्र मोदी ने कुछ माह पहले डीआरडीओ से अपील की थी कि वह प्रोजेक्ट्स को ज्यादा लंबा न खींचा करें और लेटलतीफी की आदत से बाहर निकले। तामिलमनी से जब इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने बड़े ही डिप्लोमैटिक अंदाज में जवाब दिया, 'जब आप सिर्फ 50 किमी तक ही दौड़ने के लिए फिट हों तो फिर 100 किमी के लिए कोशिशें क्यों करनीं?'
डीआरडीओ को भी शायद इस बात का अहसास हो गया है कि उसने पूर्व में कुछ गलतियां की हैं और ऐसे में बड़े कदमों को उठाने में हिचकना नहीं चाहिए।
सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्रालय की ओर से कावेरी प्रोजेक्ट पर डीआरडीओ से स्पष्टीकरण मांगा गया था। यह बात उस समय की है जब यह मसला कैबिनेट की सिक्योरिटी कमेटी के पास नहीं पहुंचा था।












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