10 साल में ED ने 193 राजनेताओं पर केस किए, लेकिन सिर्फ 2 को मिली सजा
सरकार ने संसद को बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले 10 वर्षों में 193 मामलों में वर्तमान और पूर्व सांसदों, विधायकों और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। हालांकि, सिर्फ दो मामलों में दोषसिद्धि हो पाई है।
राज्यसभा में 18 मार्च 2025 को एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2015 से फरवरी 2025 के बीच ईडी ने 193 मामले दर्ज किए, लेकिन इनका राज्यवार डेटा उपलब्ध नहीं है।

दो मामलों में दोषसिद्धि हुई....
- 1. 2016-17 में झारखंड के पूर्व मंत्री हरि नारायण राय को 7 साल की सजा और 5 लाख रुपये जुर्माना।
- 2. 2019-20 में झारखंड के पूर्व मंत्री अनोश एक्का को 7 साल की सजा और 2 करोड़ रुपये जुर्माना।
दोनों मामलों में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कार्रवाई हुई थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन दोषियों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की या नहीं।
ईडी की जांच में सबसे ज्यादा मामले कब दर्ज हुए?
ईडी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में सबसे ज्यादा 32 मामले पूर्व और वर्तमान विधायकों के खिलाफ दर्ज किए।
ईडी किस कानून के तहत जांच करता है?
ईडी मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों की जांच तीन प्रमुख कानूनों के तहत करता है...
- प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA)
- भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA)
- विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA)
सरकार का क्या कहना है?
मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि ईडी सिर्फ विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर जांच करता है और इसमें राजनीतिक संबद्धता, धर्म या किसी अन्य कारक का भेदभाव नहीं होता।
उन्होंने यह भी बताया कि ईडी की कार्रवाई हमेशा न्यायिक समीक्षा के दायरे में होती है और विशेष अदालतों, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के प्रति एजेंसी जवाबदेह है।
क्या आगे की राह?
ईडी द्वारा राजनेताओं के खिलाफ 193 मामलों में सिर्फ दो दोषसिद्धियां बताती हैं कि या तो जांच में कुछ कमी रही है या फिर अदालत में पर्याप्त सबूत पेश नहीं हो सके। इस डेटा के सामने आने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच ईडी की निष्पक्षता को लेकर बहस और तेज हो सकती है।












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