जेल में बंद कैदियों को भी मिल सकता है वोट देने का हक!

नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग चाहता है कि जेल में बंद कैदी भी वोट डाल सकें। इसके लिए उसने एक 7 सदस्यीय कमेटी बनाई है, जो उन संभावनाओं को तलाशेगी, जिनसे जेल में बंद कैदियों पर वोट डालने को लेकर प्रतिबंध को हटाया जा सके।

election commission

आपको बता दें कि रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1951 की धारा 62(5) के तहत ऐसा कोई भी व्यक्ति जो न्यायिक हिरासत में है या फिर किसी अपराध के लिए सजा काट रहा है, वह वोट नहीं दे सकता है।

जनरल इलेक्शन 2014 की रेफेरेंस हैंडबुक के अध्याय 43 के तहत जिन कैदियों पर मुकदमा चल रहा है, उन्हें चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने पर प्रतिबंध है, भले ही मतदाता सूची में उनका नाम हो। सामान्य जनता के अलावा वोट सिर्फ वही दे सकते हैं, जो पुलिस हिरासत में हैं।

इस कमेटी का गठन अप्रैल में डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संदीप सक्सेना ने किया गया था। इस कमेटी का गठन कई लोगों से इसके लिए सुझाव मिलने के बाद किया गया, जिनमें से एक था दिल्ली पुलिस के सत्यवीर सिंह राठी का सुझाव कि कैदियों को वोट करने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए?

कभी असिस्टेंट कमिश्नर रह चुके सत्यवीर सिंह राठी को दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुई मुठभेड़ में दोषी पाया गया और फिलहाल वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक इस कमेटी में बिहार चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (सीईओ) और दिल्ली सीईओ भी सदस्य हैं। वे लोग इस बात अन्य देशों की तरफ से की जा रही प्रैक्टिस का अध्ययन कर रहे हैं।

आपको बता दें कि यूके, ऑस्ट्रिया, रूस और अर्मेनिया कैदियों को मतदान की इजाजत नहीं देते हैं, जबकि स्पेन, स्वीडन, स्विटजरलैंड और फिनलैंड में कैदियों को वोट देने की आजादी है।

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