शिक्षा की गलत जानकारी देना उम्मीदवारों को पड़ेगा भारी, रद्द हो सकता है निर्वाचन
सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि मतदाता को चुनावी उम्मीदवार की शैक्षिक स्थिति जानने का पूरा अधिकार है। ये उनके मौलिक अधिकार में शामिल है।
नई दिल्ली। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई भी उम्मीदवार नामांकन पत्र में शिक्षा संबंधी गलत जानकारी मुहैया कराता है तो उसका निर्वाचन रद्द हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि मतदाता को चुनावी उम्मीदवार की शैक्षिक स्थिति जानने का पूरा अधिकार है। ये उनके मौलिक अधिकार में शामिल है।
ऐसे अगर कोई उम्मीदवार अपने नामांकन पत्र में अपनी शिक्षा को लेकर कोई गलत जानकारी मुहैया कराएगा तो उसका निर्वाचन रद्द किया जा सकता है।
जस्टिस एआर दवे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान ये फैसला सुनाया। मामला मणिपुर के विधायक मेरेम्बम पृथ्वीराज के निर्वाचन से जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस विधायक के नामांकन मामले पर सुनवाई के दौरान सुनाया फैसला
जानकारी के मुताबिक पृथ्वीराज ने अपने नामांकन पत्र में एमबीए डिग्री होने की जानकारी दी थी, जो गलत है। इसी के आधार पर कोर्ट ने उनका नामांकन रद्द कर दिया।
कोर्ट ने फैसले में कहा कि नागरिकों के मतदान का अधिकार देना व्यर्थ है अगर नागरिक को अपने उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी नहीं होगी। खास तौर से उनके शैक्षिक स्तर की जानकारी होना अहम है।
कोर्ट ने कहा कि प्रत्याशी को जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों और फॉर्म 26 में जिक्र है कि किसी भी चुनाव में प्रत्याशी को शैक्षणिक योग्यता के बारे में सही जानकारी मुहैया कराना उनका कर्तव्य है।












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