Economic Survey 2023 Highlights: सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत
आर्थिक सर्वेक्षण 2023: दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यस्था बना रहेगा भारत। चालू वित्त वर्ष में 7 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान। अगले वित्त वर्ष के अनुमान को घटाया

Economic Survey 2023 Highlights: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज आर्थिक सर्वेक्षण 2023 संसद में पेश कर दिया है। इसमें केंद्र सरकार ने यह बताया है कि भारत आगे भी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। आर्थिक सर्वे 2023 में वित्त वर्ष 2023 में जीडीपी का विकास दर 7% और वित्त वर्ष 2024 में 6 से 6.8% रहने का अनुमान जताया गया है। आर्थिक समीक्षा सरकार की ओर आम बजट से एक दिन पहले पेश करने की परंपरा रही है। यह पूरे वित्त वर्ष का पूरा वित्तीय ब्योरा होता है, जो बजट घोषणाओं से अलग ज्यादा वास्तविक आंकड़ों को बयां करता है। आइए जानते हैं कि इस साल के आर्थिक सर्वे के मुख्य बिंदु क्या हैं-

आर्थिक सर्वेक्षण 2023 संसद में पेश
संसद में वित्त मंत्री की ओर से जो आर्थिक सर्वे पेश किया गया है, वह दस्तावेज वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले आर्थिक मामलों के विभाग के इकोनॉमिक डिविजन की ओर से तैयार किया गया है। यह मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरम की निगरानी में तैयार हुआ है। आर्थिक सर्वेक्षण से देश की आर्थिक स्थिति का एक ब्योरा मिल जाता है। सरकार ने पिछले साल जो बजट घोषणाएं की थीं, उसने आंकड़ों में किस तरह का प्रदर्शन किया है, उसका अंदाजा इससे लग जाता है।

सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा
- भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रही है बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। चालू वित्त वर्ष में जीडीपी का विकास दर 7% रहने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था 8.7% के दर से विकसित हुई थी।
- वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी का विकास दर 6 से 6.8 % रहने का अनुमान है, जो कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक हालातों पर निर्भर करेगा।
- आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 में वित्त वर्ष 2024 में सांकेतिक रूप से 11% और वास्तविक रूप से 6.5% की बेसलाइन जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
- महामारी के बाद भारत ने आर्थिक तौर पर आनुपातिक हिसाब से तेजी से रिकवर किया और आने वाले वर्षों में भी विकास मजबूत घरेलू मांग और कैपिटल इंवेस्टमेंट के दम पर अच्छा रहने का अनुमान है।

PPP के मामले दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
- PPP (क्रय शक्ति समानता) के मामले में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, विनिमय दर के मामले में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- जीडीपी के प्रतिशत के तौर पर निजी खपत वित्त वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही में 58.5 प्रतिशत रही, जो कि साल 2013-14 के बाद दूसरी तिमाही में सबसे ज्यादा है।
- निजी खपत, बेहतर कॉर्पोरेट बैलेंस शीट, छोटे कारोबार में बढ़ोतरी और शहरों की ओर प्रवासी कामगारों के लौटने की वजह से यह आर्थिक विकास संभव हुआ है।
- महामारी और यूरोप में हो रहे संघर्ष की वजह से अर्थव्यस्था ने जो खोया था उसे लगभग 'फिर से प्राप्त' किया है, जो रुक गया था उसका 'नवीनीकरण' हुआ है और जो धीमा हुआ था वह, 'पुनर्जीवित' हुआ है।

खुदरा मुद्रास्फीति टारगेट रेंज में वापस लौटी
- खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर 2022 में आरबीआई के टारगेट रेंज के भीतर वापस आ गई है।
- कर्ज लेने की लागत 'लंबे वक्त तक ऊंची' रह सकती है।
- आर्थिक समीक्षा के मुताबिक हालांकि, बाकी देशों की मुद्राओं की तुलना में रुपया बेहतर स्थिति में है, लेकिन अमेरिकी फेड की पॉलिसी रेट की संभावनाओं से जुड़ी हुई है।
- वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतें बढ़ने से चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, लेकिन आर्थिक विकास की गति मजबूत रहेगी।
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वित्त वर्ष 2023 में पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार
- लेकिन, यदि चालू खाता का घाटा बढ़ता है तो रुपए पर दबाव बढ़ सकता है।
- वित्त वर्ष 2023 में भारत के पास भारतीय रुपए की सुरक्षा के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है।
- वित्त वर्ष 2022 में निर्यात में बढ़ोतरी ने वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में उत्पादन प्रक्रिया को धीमी गति से क्रूज मोड में डाल दिया।












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