चुनाव आयोग ने दिया खुला चैलेंज, कहा-ईवीएम को हैक करके दिखाओ
राजनीतिक पार्टियों, तकनीकी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को खुला चैलेंज देते हुए कहा कि मई की पहले सप्ताह में वो साबित करके दिखाएं कि ईवीएम में छेड़छाड़ की जा सकती है।
नई दिल्ली। भारतीय चुनाव आयोग ने खुद की साख को बचाने के लिए अब राजनीतिक पार्टियों, तकनीकी विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को खुला चैलेंज देते हुए कहा कि मई की पहले सप्ताह में वो साबित करके दिखाएं कि ईवीएम में छेड़छाड़ की जा सकती है।


चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बन गया
यूपी में भारतीय जनता पार्टी के प्रचंड बहुत से जीत हासिल करने के बाद से पूरे देश में ईवीएम से छेड़खानी का मुद्दा चर्चा में है। श्रीनगर लोकसभा सीट और 9 विधानसभा सीटों पर कल खत्म हुए उप चुनावों के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर ईवीएम में गड़बड़ी के मुद्दे को जोरशोर से उठाया था। केजरीवाल ने कहा है कि ईवीएम में बहुत शातिर तरीके से गड़बड़ीकी जा रही है और चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बन गया है।

ईवीएम का सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामिंग, कोड बदला गया
केजरीवाल ने आरोप लगाते हुए कहा था कि चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बनकर अपने बेटे दुर्योधन (भाजपा) को साम, दाम, दंड, भेद करके सत्ता में पहुंचाना चाहता है। अपनी बात को मजबूती से रखते हुए केजरीवाल ने कहा कि मैं भी इंजीनियर हूं, IIT से पढ़ा हूं। यह गड़बड़ी नहीं मशीन से छेड़छाड़ है। केजरीवाल ने कहा कि ईवीएम में इस तरह से कोडिंग की गई है कि बटन कोई भी दबाओ, वोट भाजपा को ही जाता है। दिल्ली में एमसीडी चुनाव के लिए भी राजस्थान से मशीनें मंगवाई जा रही हैं। केजरीवाल ने कहा कि इन जो मशीनें आ रही हैं उनमें पहले ही गड़बड़ी साबित हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि ईवीएम का सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामिंग, कोड बदला गया है।

पहले भी हुई भी शिकायत , 600 लोगों का हलफनामा, हमारे वोट चोरी हो गए
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक वकोला के 600 वोटरों ने बॉम्बे हाईकोर्ट को हलफनामा देकर कहा है कि उन सबने अपने वोट एक निर्दलीय उम्मीदवार को दिया पर जब गिनती हुआ तो वोट गायब मिले। इन 600 मतदाताओं ने अपनी शिकायत में वोट चोरी होने की बात कहते हुए अदालत से दखल देने की बात कही है। शिकायत हाल ही में खत्म हुए बीएमसी चुनावों को लेकर है।
ये है पूरा मामला मामला
मुंबई के वकोला इलाके में वार्ड नंबर 88 का है। वार्ड में 13 उम्मीदवार चुनावी लड़े जिनमें निर्दलीय नीलोत्पल मृणाल भी थे। उन्हें चुनाव में महज 375 वोट मिले थे। अब इलाके के 600 मतदाताओं ने एफिडेविट पर साइन करके, अपने वोटर आईडी की फोटो कॉपी के साथ, नाम, पता, मोबाइल नंबर लिखकर हाईकोर्ट में अर्जी दी है कि उन्होंने जिस उम्मीदवार को वोट दिया उसे मिला ही नहीं।

वोट गिने जाने के बाद ही हुआ शक
चुनाव हारने वाले नीलोत्पल ने कहा कि अगर मुझे हर बूथ से 50-60 वोट मिलते तो शायद पता करने में दिक्कत होती लेकिन 4-5 वोट मिले जहां से दुगुने से ज्यादा लोगों ने मुझे शपथपत्र देकर कहा कि उन्होंने मुझे वोट दिया था। याचिकाकर्ताओं के वकील श्रवण गिरी ने कहा कि याचिका दाखिल हो गई है। हम चाहते हैं कि अदालत जांच करवाए कि लोगों के वोट कहां गए, आखिर ये मतदाता के देश के सिस्टम पर भरोसे का सवाल है।
हाल ही में मध्य प्रदेश में भी उठे हैं सवाल
मध्य प्रदेश में 2 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। उसकी तैयारी के दौरान ट्रायल कराया जा रहा था। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पत्रकारों के सामने ही ईवीएम के बटन दबाए तो दूसरे निशान के सामने का बटन दबाने पर कमल के निशान की पर्ची निकली, जिसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने मामले को मीडिया में ना लाने की बात कही। इसको लेकर विपक्षी दल संसद से लेकर सड़क तक सवाल उठा रहे हैं।












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