निजी ट्रेनों के कारण सामान्य ट्रेनों की बढ़ेगी लेटलतीफी, हजारों की जा सकती हैं नौकरी!
बेंगलुरु। देश मे गैरआधिकारिक तरीके से रेलवे में निजीकरण की शुरूआत हो चुकी है। लखनऊ से देश की पहली प्राइवेट ट्रेन को नई दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया है। शुक्रवार से लखनऊ से दिल्ली के बीच चलाई गई तेजस एक्सप्रेस को देश में प्राइवेट ट्रेनों के युग की शुरुआत माना जा रहा है। माना जा रहा हैं कि संचालन में निजी ट्रेनों को वरीयता मिलने से सामान्य ट्रेनों की लेटलतीफी और बढ़ेगी, जिससे आम यात्री और परेशान होंगे। इसके अलावा हजारों टिकटिंग स्टाफ, टीटीई आदि की नौकरी जाएगी। यही वजह है कि रेलकर्मी इसका विरोध कर रहे हैं। रेलवे यूनियनों ने विरोध के साथ प्राइवेट ट्रेनों के फेल होने की भविष्यवाणी कर दी है।

बता दें इससे एक दिन पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में दिल्ली से कटरा के बीच चलने वाली दूसरी वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2019 में नई दिल्ली से वाराणसी के बीच देश की पहली सेमीहाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत का संचालन शुरू किया था। पिछले नौ माह में तीन हाईस्पीड ट्रेनों की शुरूआत बताती है कि भारतीय रेलवे का चेहरा मोहरा तेजी से बदल रहा है। शुक्रवार से लखनऊ से दिल्ली के बीच चलाई गई तेजस एक्सप्रेस को देश में प्राइवेट ट्रेनों के युग की शुरुआत माना जा रहा है। यदि ये प्रयोग कामयाब हुआ तो भविष्य में ट्रेन संचालन पूरी तरह प्राइवेट सेक्टर के हवाले हो सकता है।
लेकिन सवाल ये उठता हैं तेजस जैसी प्राइवेट ट्रेन में केवल पैसे वाले लोग ही सफर कर सकेंगे? आम इंसान जो इन प्राइवेट ट्रेनों के मंहगे टिकट तो अफोर्ड नहीं कर सकेगा इसलिए उसका आसरा तो सामान्य ट्रेन ही हैं। चूंकि यह हाईस्पीड ट्रेने हैं तो इनको संचालन में वरीयता दी जाएंगी जिस कारण बाकी सामान्य ट्रेन जो पहले से ही अपनी लेटलतीफी के लिए जानी जाती हैं इनके कारण वो और लेट हुआ करेंगी। जिससे अपने निर्धारित समय से हमेशा से लेट चलने वाली भारतीय रेल और लेट चला करेगी । जिसका खामियाजा इसमें यात्रा करने वाले यात्रियों को झेलनी पड़ेगी।

गौर करने वाली बात ये हैं कि पहली निजी ट्रेन के साथ, पहली बार ट्रेन के लेट होने पर मुआवजा देने का प्रावधान भी कर दिया गया है। नई दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली पहली प्राइवेट ट्रेन ने यात्रा में एक घंटे की देरी होने पर 100 रुपये और दो घंटे से ज्यादा की देरी पर 250 रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। यात्रियों को मुआवजा न देना पड़े इसके लिए यह बात लाजमी हैं कि दूसरी सामान्य ट्रेनों के बजाय इसकी निर्धारित स्पीड को बरकरार रखने के लिए इसे ही वरीयता दी जाएगी।
मीडिया को दिए साक्षात्कार में रेलवे की सबसे बड़ी यूनियन आल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआइआरएफ) के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा ने रेलवे के इरादों पर हैरानी जताते हुए कहा कि 'हमें इन शर्तो के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि निजी ट्रेनों में सिर्फ संपन्न लोग यात्रा कर सकेंगे। संचालन में निजी ट्रेनों को वरीयता मिलने से सामान्य ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ेगी, जिससे आम यात्री परेशान होंगे। इसके अलावा हजारों टिकटिंग स्टाफ, टीटीई आदि की नौकरी जाएगी। हम ट्रेनों के संचालन का जमकर विरोध करेंगे।'

बता दें कि प्राइवेट ट्रेनों में प्राइवेट आपरेटर को किराया तय करने के अलावा ट्रेन के भीतर अपना टिकट चेकिंग स्टाफ तथा कैटरिंग एवं हाउसकीपिंग स्टाफ रखने की छूट होगी। जबकि लोको पायलट, और गार्ड तथा सुरक्षा कर्मी रेलवे के होंगे। रेलवे अपने इंफ्रास्ट्रक्चर एवं रनिंग स्टाफ का उपयोग करने के लिए प्राइवेट आपरेटर से हॉलेज शुल्क वसूलेगा। चूंकि लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस का संचालन रेलवे का ही एक पीएसयू आइआरसीटीसी निजी कंपनियों के सहयोग से कर रहा है। इसमें आईआरसीटीसी और प्राइवेट आपरेटर के बीच कंसेशन एग्रीमेंट होगा और दोनो उसी के अनुसार कार्य करेंगे। इसके तहत आइआरसीटीसी को प्राइवेट आपरेटर से लाभ में हिस्सेदारी प्राप्त होगी। और उसमें से वो रेलवे को हॉलेज शुल्क अदा करेगा। कुल मिलाकर इन प्राइवेट ट्रेनों में न तो काला कोट पहने हुए रेलवे का टीटी होगा और न ही रेलवे का स्टाफ । ऐसे में टीटी समेत अन्य स्टाफ पर प्राइवेट ट्रेनों के संचालन से रोजगार पर खतरा मंडरा रहा हैं।












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