इंडिया 2020 का सपना अधूरा छोड़ कर चले गये कलाम साहब
[अंकुर सिंह] अवुल पाकिर जैनुलआबदीन अब्दुल कलाम इसे सिर्फ नाम नहीं बल्किदेश की एक विरासत के रुप में लोग जानते थे। देश के लिए उनकी उपलब्धियों का भूल पाना नामुमकिन है। देश ही नहीं दुनियां को भी यह यकीन नहीं हो रहा है कि कलाम साहब इस दुनिया में नहीं रहे हैं।
अब्दुल कलाम ने देश के लिए वर्ष 2020 तक एक नया सपना देखा था। वह वर्ष 2020 तक इस देश को नयी बुलंदियों तक पहुंचाने का सपना देखा था। कलाम साहब ने अपनी किताब भारत 2020 में लिखा है कि वह इस देश को 2020 तक या उससे पहले तक इस देश को एक विकसित देश के रूप में स्थापित करना एक सपना नहीं है।
हर भारतीय का मिशन होना चाहिए विकसित देश
कलाम साहब चाहते थे कि भारत को 2020 तक विकसित देश के रूप में देखना एक सपना नहीं बल्कि एक मिशन होना चाहिए और यह मिशन हर भारतीय के दिल में होना चाहिए। [कलाम साहब से जुड़ी खबरें]
अपनी किताब में कलाम साहब ने देश की कमजोरियों और ताकत पर चर्चा करते हुए लिखा है कि कैसे वह अपनी ताकतों का इस्तेमाल करते हुए दुनिया में सबसे बड़ी आर्थिक ताकत के रूप में वर्ष 2020 तक उभर सकता है।
बच्ची के सपने को कलाम ने अपना सपना बनाया
इस किताब को कलाम साहब ने एक बच्ची को समर्पित किया था जिससे मिलने के बाद उन्होंने पूछा था कि तुम्हारा सपना क्या है, उस वक्त उस बच्ची ने कहा था कि मैं एक विकसित भारत में रहना चाहती हूं।
अपनी किताब में कलाम साहब देश को दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत और सुपरपावर के रूप में स्थापित होते देखना चाहते थे। वह परमाणु ताकत को देश को सुपरपावर के रूप में स्थापित करने के हथियार के रूप में देखते थे।
सुपरपॉवर बनेगा भारत
कलाम साहब चाहते थे कि देश के हर नागरिक को भारत को एक विकसित देश बनाने का सपना देखना होगा और तभी यह सपना सच हो सकता है। लेकिन जिस तरह से कलाम साहब ने दुनिया को अलविदा कहा उसने लोगों की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। ऐसे में देश की उनके प्रति सच्ची श्रद्दांजली यही हो सकती है कि उनके सपने को पूरा देश देखे और वर्ष 2020 तक भारत को एक विकसित देश के रूप मे स्थापित करे।













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