DRDO ने लड़ाकू विमानों के लिए बनाई एडवांस टेक्नोलॉजी, दुश्मन की नजर में आए बिना मचाएंगे तबाही
नई दिल्ली, 19 अगस्त: पाकिस्तान से लगातार हमारी तनातनी जारी है, तो वहीं दूसरी ओर चीन से भी हमारा सीमा विवाद लद्दाख में चल रहा है। ऐसे में देश के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने डिफेंस टेक्नोलॉजी को मजबूत बनाने की दिशा में एक और नया कदम उठाया है, जिसके तहत लड़ाकू विमानों को दुश्मन के रडार से बचाने की नई तकनीक विकसित की गई है। आइए जानते हैं कैसे ये काम करेगी, साथ ही इससे सैन्य बलों को क्या फायदा होगा।

एडवांस शेफ टेकनीक विकसित
'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में डीआरडीओ ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। इसके तहत DRDO की रक्षा प्रयोगशाला जोधपुर (DLJ) ने शत्रुतापूर्ण रडार खतरों के खिलाफ भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की सुरक्षा के लिए एक एडवांस शेफ टेकनीक विकसित की है। डीआरडीओ ने बताया कि डीएलजे ने उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, पुणे के सहयोग से वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए एडवांस शेफ सामग्री और शेफ कार्ट्रिज-118/I को विकसित किया है।

दुश्मन के रडार के खतरे से बचाने की तकनीक
डीआरडीओ के मुताबिक इसके सफल ट्रायल टेस्टिंग के पूरा होने के बाद अब इस तकनीक को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बता दें कि यह डीआरडीओ की ओर से मिसाइल हमलों से बचाने के लिए नौसेना के जहाजों के लिए एक समान तकनीक विकसित करने के कुछ महीने बाद आया है। तकनीक को तीन प्रकारों में विकसित किया गया था। नौसेना के जहाज पर अरब सागर में तीनों प्रकारों का परीक्षण किया और प्रदर्शन को संतोषजनक पाया।

जानिए क्या है शेफ तकनीक
DRDO के अनुसार यह एक इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर तकनीक है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर की सेनाएं नौसेना के जहाजों और विमानों की तरह अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए करती हैं। यह संपत्ति को रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी से बचाता है। नौसैनिक जहाजों के मामले में हवा में शेफ रॉकेट तैनात किए जाते हैं, जो मिसाइल गाइडेंस टेक्नोलॉजी के लिए कई टारगेट के रूप में काम करती है।

रडार-ट्रैकिंग हथियारों को गुमराह किया जा सकता है
इसका उपयोग रडार-ट्रैकिंग हथियारों को गुमराह करने के लिए किया जाता है। शेफ कई छोटे एल्यूमीनियम या जस्ता लेपित फाइबर से बना होता है। इसे प्लेन में कारतूस के रूप में रखा जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार नौसेना की गुणात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वदेशी रूप से महत्वपूर्ण तकनीक के तीन संस्करण विकसित किए, जैसे शॉर्ट रेंज शेफ रॉकेट (SRCR), मीडियम रेंज शेफ रॉकेट (MRCR) और लॉन्ग रेंज शेफ रॉकेट (LRCR)। डीएलजे की ओर से एडवांस्ड शेफ टेक्नोलॉजी का सफल विकास आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम हैं।












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