काली-5000 के दम पर चीन को दम दिखा रहे हैं हम, जानिए ये सीक्रेट हथियार
Doklam standoff, KALI 5000 India's weapon to destroy chinease missiles and aircrafts
नई दिल्ली। डोकलाम में सीमा विवाद को लेकर चीन और भारत के बीच टकराव चल रहा है। चीन का रुख हमेशा की तरह आक्रामक है और वह लगातार भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है। दूसरी ओर भारत बड़ी ही समझदारी के साथ चीन के जुबानी हमलों का जवाब दे रहा है। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ड्रैगन को दो लाइनों में समझा चुके हैं कि आज के भारत और 1962 के भारत में बहुत अंतर है। आखिर आज के भारत के पास ऐसा क्या है, जो चीन को घुटनों के बल बैठने को मजबूर कर देगा। आज हम बताते हैं भारत के ऐसे ब्रह्मास्त्र के बारे में, जो चीन को तहस-नहस कर देगा इसका नाम है-काली/KALI 5000। इसके नाम से ही चीन और पाकिस्तान में खलबली मच जाती है। ऐसा कहा जाता है कि भारत ने बेहद गोपनीय तरीके से पाकिस्तान का पूरा ग्लेशियर इस अचूक हथियार के एक वार से तबाह कर दिया था।


संसद तक में नहीं दी गई इस हथियार के बारे में जानकारी
काली/KALI 5000 नाम के इस तूफान के बारे में भारत सरकार या सेना ने अभी तक कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। दिसंबर 2015 में काली यानी काली यानी किलो एम्पियर लीनियर इंजेक्टर के बारे में संसद में प्रश्न पूछा गया था, लेकिन तब के रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने इसके बारे में यह कहते हुए जवाब देने से इनकार कर दिया था कि यह भारत का बेहद सीक्रेट प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट पर पूरी दुनिया की नजर है। चीन और पाकिस्तान दोनों भारत के इस अचूक हथियार का नाम सुनते ही खौफ जाते हैं, क्योंकि यह हथियार परमाणु बम से भी ज्यादा विध्वंसक है। जानकार मानते हैं कि इस बार अगर चीन-भारत के बीच युद्ध हुआ तो उसका नतीजा जमीन पर नहीं बल्कि हवा में होगा और ऐसे में काली और भी घातक साबित होगा।
Recommended Video


आखिर काली है क्या
काली को अदृश्य तरंगों वाला ब्रह्मास्त्र कह सकते हैं। काली 5000 वह तकनीक है, जिसके जरिए लेजर जैसी अदृश्य बीम से हमला करके दुश्मनों के हथियारों को हवा में ही नष्ट किया जा सकेगा। दुश्मन की मिसाइलें, लड़ाकू विमान, यहां तक कि काली को अंतरिक्ष में उपग्रहों को भी मार गिराने में सक्षम बताया जाता है।

दुश्मन का पूरा कम्युनिकेशन नेटवर्क कर देगा ध्वस्त
पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी के मुताबिक, भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर और डीआरडीओ मिलकर 'काली 5000' को बना रहे हैं। फिलहाल, इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अन्य कार्यों में हो रहा है। भविष्य में इस तकनीकि के जरिए अंतरिक्ष में जासूसी भी की जा सकेगी और दुश्मन के संचार और रॉकेट मिसाइल तंत्र को घर बैठे ठप किया जाकेगा।

2004 में ही तैयार कर लिया गया काली 5000
अब तक काली 80, काली 200, काली 1000, काली 5000 और काली 10000 नाम के प्रोटो टाइप बनाए जा चुके हैं। इनका विकास कार्य जारी है। कई विशेषज्ञ ऐसा दावा कर चुके हैं कि काली 5000 को भारत 2004 में ही तैयार कर चुका है और जरूरत पड़ने पर भारत इस हथियार को इस्तेमाल कर सकता है।

अमेरिका को छोड़ किसी के पास नहीं ऐसी टेक्नोलॉजी
काली के स्तर की उन्नत टेक्नोलॉजी अमेरिका को छोड़कर दुनिया में अभी तक किसी देश के पास नहीं है। काली 5000 मिशन 1985 में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉक्टर आर चिदंबरम ने शुरू किया था। ऐसा माना जाता है कि सरकार की मंजूरी के बाद 1989 में बेहद गोपनीय तरीके से इस पर कार्य शुरू हुआ था












Click it and Unblock the Notifications