Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Doklam के 73 दिन, जिसका जिक्र राहुल गांधी ने किया, डटी रही भारतीय सेना, बिना गोली चलाए रोक दिए थे चीनी सैनिक

Doklam controversy: लोकसभा में सोमवार को डोकलाम विवाद ने अचानक सियासी तापमान बढ़ा दिया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का हवाला देकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तीखे पलटवार के बाद सदन करीब 45 मिनट तक हंगामे की गिरफ्त में रहा। इस बहस ने देश को एक बार फिर 2017 के उस ऐतिहासिक डोकलाम गतिरोध की याद दिला दी, जिसने भारत-चीन संबंधों को नई दिशा दी थी।

क्या है डोकलाम और क्यों है इतना संवेदनशील?

डोकलाम पूर्वोत्तर भारत में 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक रणनीतिक पठार है। यह भारत, भूटान और चीन (तिब्बत) का ट्राई-जंक्शन क्षेत्र है। भूटान इसे अपना इलाका मानता है, जबकि चीन इस पर 'डोंगलांग' के नाम से दावा करता रहा है। भारत के लिए डोकलाम इसलिए अहम है क्योंकि यहां चीनी मौजूदगी सिलीगुड़ी कॉरिडोर-यानी 'चिकन नेक'-के बेहद करीब पहुंच सकती है, जो पूर्वोत्तर भारत की जीवनरेखा है।

Doklam controversy

सड़क से शुरू हुआ विवाद, आमने-सामने आईं सेनाएं

जून 2017 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने डोकलाम में सड़क निर्माण कार्य शुरू किया। 16 जून को काम तेज हुआ, जिस पर भूटान ने विरोध जताया, लेकिन चीन ने आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद 18 जून को भारत ने हस्तक्षेप किया। सिक्किम के रास्ते करीब 270-300 भारतीय सैनिक डोकलाम पहुंचे और चीनी निर्माण कार्य को रोक दिया।

73 दिन का सैन्य गतिरोध: एक भी गोली नहीं, लेकिन जबरदस्त तनाव

डोकलाम में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने खड़े हो गए। आगे कुछ सौ जवान थे, लेकिन पीछे हजारों सैनिक अलर्ट पर थे। चीन लगातार आक्रामक बयान दे रहा था और भारतीय सेना पर 'अतिक्रमण' का आरोप लगा रहा था। इसके बावजूद भारत ने भूटान की संप्रभुता और अपनी रणनीतिक सुरक्षा के लिए 73 दिनों तक मोर्चा संभाले रखा।

कूटनीति की जीत: कैसे खत्म हुआ गतिरोध?

16 जून से 28 अगस्त 2017 तक चला यह टकराव अंततः 'एक्सपीडिशस डिसएंगेजमेंट' पर खत्म हुआ। दोनों पक्ष पीछे हटे, चीन ने निर्माण उपकरण हटाए और सड़क निर्माण रोक दिया। भारत ने अपने सैनिक वापस बुलाए। यह समझौता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात प्रस्तावित थी।

अजित डोभाल की बीजिंग यात्रा और बैक-चैनल डिप्लोमेसी

इस संकट के समाधान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की भूमिका अहम रही। जुलाई 2017 में बीजिंग जाकर उन्होंने चीनी नेतृत्व से बातचीत की। ब्रिक्स एनएसए बैठक के दौरान शी जिनपिंग के सलाहकार यांग जीची से हुई चर्चा को गतिरोध तोड़ने में निर्णायक माना जाता है।

संसद में सियासत क्यों गरमाई?

सोमवार को राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि डोकलाम की 'हकीकत' सेना जानती है, लेकिन सरकार जनता से छिपा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि अप्रकाशित किताब के आधार पर संसद में बयान कैसे दिया जा सकता है। इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

क्यों आज भी प्रासंगिक है डोकलाम?

डोकलाम सिर्फ एक सीमा विवाद नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, भूटान की संप्रभुता और चीन के विस्तारवादी रवैये से जुड़ा मुद्दा है। यही वजह है कि आठ साल बाद भी यह मामला संसद से लेकर कूटनीतिक गलियारों तक बहस का केंद्र बना हुआ है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+