आंकलन: मोटी सैलरी ठुकराकर अपने देश लौट रहे हैं धरती के 'भगवान'

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देश में विदेशों की तर्ज पर आधुनिकतम अस्पातल खुलने और कामकाज के बेहतर मौके ने इस रिवर्स ब्रेन ड्रेन को बढ़ावा दिया है। तमिलनाडु के रहने वाले डा. पाल रमेश ने बेहतर प्रशिक्षण और पैसे कमाने की ललक में नब्बे के दशक में ब्रिटेन का रुख किया था। देश की स्वास्थ्य राजधानी के तौर पर उभरे चेन्नई में इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इसे रिवर्स ब्रेन ड्रेन करार देते हैं। अब राज्य के ज्यादातर डाक्टर यूरोप और अमेरिका में मलाईदार नौकरियां छोड़ कर यहां लौट रहे हैं।
चेन्नई ही नहीं, देश के दूसरे शहरों में भी यही हालत है। अपोलो अस्पताल को हर साल औसतन ब्रिटेन और दूसरे देशों में काम करने वाले डाक्टरों के सैकड़ों नौकरी के आवेदन मिलते हैं। बावजूद इसके यहां की तकनीकि व सुविधाओं से अभिभूत डॉक्टर अपनी ज़मीन नहीं छोड़ रहे हैं।
इसके अलावा रहन-सहन का स्तर भी पहले के मुकाबले काफी सुधरा है।" उनकी दलील है कि जब तमाम सुविधाएं और बेहतर वेतन यहीं मिल रहा है तो लोग हजारों मील दूर परदेस में क्यों जाएंगे ?इसी के साथ चिकित्सक वर्ग से यह सुझाव भी आ रहे हैं कि भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी लाकर अत्याधुनिक बनाया जा सकता है।












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