No-confidence motion पर विपक्षी गठबंधन में ही 'अविश्वास'? बैकफुट पर कांग्रेस

लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के मामले में विपक्षी गठबंधन के बीच ही आपसी तालमेल में भारी 'अविश्ववास' देखने को मिला है। 26 विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन में मतभेद उभरने के बाद कांग्रेस ने फौरन 'गलती' पर 'अफसोस' जताकर हालात संभालने की कोशिश की है।

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से पहले इंडिया गठबंधन की एकजुटता की ताकत दिखाने का मंसूबा तैयार किया था। लेकिन, कांग्रेस नेतृत्व की 'जल्दबाजी' की वजह से सहयोगी दलों के बीच ही आपस में अविश्वास की एक दीवार खड़ी हो गई।

india and no confidence motion

अविश्वास पर नोटिस देने में कांग्रेस की जल्दबाजी से नाराजगी
दरअसल, अविश्वास प्रस्ताव पर नोटिस देने में कांग्रेस ने एकतरफा जल्दबाजी दिखाई, जो इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगियों में नाराजगी पैदा कर गई। स्थिति ये हो गई कि कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी की ओर से हुई भूल को स्वीकार किया और सहयोगियों को शांत करने के लिए पार्टी की ओर से खुद खेद जाहिर किया है।

सहयोगी दलों ने कांग्रेस के रवैए का किया विरोध
रिपोर्ट के अनुसार विपक्षी गठबंधन के नेता कांग्रेस की ओर से अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लेकर गौरव गोगोई को स्पीकर के दफ्तर में भेजने की 'जल्दी' पर भड़क गए थे। कुछ नेताओं के मुताबिक इंडिया गठबंधन के सदन के नेताओं की बैठक में बुधवार को इस मसले पर कांग्रेस के एकतरफा कदम का सहयोगी दलों ने विरोध किया।

'कांग्रेस ने इसे अपना मुद्दा बनाने की कोशिश की'
उनका कहना था कि क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला सामूहिक तौर पर लिया गया था, इसलिए नोटिस को भी इंडिया गठबंधन के नेताओं के सामूहिक हस्ताक्षर के साथ जमा किया जाना चाहिए था, लेकिन कांग्रेस ने इसे अपना मुद्दा बनाने की कोशिश की, जो कि इंडिया गठबंधन के सामूहिक कार्य करने और निर्णय लेने की भावना के खिलाफ है।

इंडिया गठबंधन के इन नेताओं ने कांग्रेस को घेरा
कांग्रेस की इस हरकत का विरोध करने वालों में टीएमसी के डेरेक ओ'ब्रायन, डीएमके के टीआर बालू, सपा के रामगोपाल यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, सीपीएम के एलामाराम करीम और सीपीआई के बिनॉय विश्वम शामिल थे। इसके बाद खड़गे ने यह कहकर उन्हें शांत कराने की कोशिश की कि कांग्रेस की ओर से जो हुआ वह एक चूक थी और इस पर उन्हें खेद है।

कांग्रेस की ओर से सहयोगियों को मनाने की कोशिश
बाद में कांग्रेस की ओर से पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने औपचारिक तौर पर बयान देकर स्थिति साफ करने की कोशिश की कि, 'हम इस तथ्य को स्पष्ट करना चाहते हैं कि अविश्वास प्रस्ताव अकेले कांग्रेस का नहीं है, बल्कि यह इंडिया के सहयोगी दलों की ओर से एक सामूहिक प्रस्ताव है।'

कांग्रेस के अपने सांसदों में भी असमंजस
वैसे कांग्रेस जानती है कि बहुत ही मुश्किल से 26 विपक्षी दल एकजुट हो पाए हैं, जिन्हें साथ लेकर चलने में हर कदम पर बाधाएं पार करनी पड़ सकती हैं। सहयोगी दलों की नाराजगी से पहले खुद पार्टी नेतृत्व के एक फैसले से कांग्रेस सांसद ही हैरान रह गए थे। पहले पार्टी सांसदों को अनौपचारिक तौर पर बताया गया था कि अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस या तो लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी देंगे या वरिष्ठ सांसद मनीष तिवारी देंगे।

लेकिन बाद में पता चला कि इसके लिए कांग्रेस आलाकमान ने लोकसभा में पार्टी उपनेता गौरव गोगोई को चुना है। कुछ नेताओं का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस की वजह से अधीर रंजन के नाम से परहेज करना पड़ गया। तो कुछ का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव मणिपुर के मसले पर लाना है, इसलिए असम से सांसद होने की वजह से गोगोई को यह जिम्मेदारी दी गई।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+