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भारत और मलेशिया के बीच बनी इस सहमति की इतनी चर्चा क्यों

मलेशिया की कमान जब महातिर मोहम्मद के पास थी तो अक्सर रिश्तों में तनाव की चर्चा होती थी. लेकिन अब लगता है कि दोनों देश तनाव के दौर से निकल चुके हैं और कई अहम फ़ैसले ले रहे हैं.

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम
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मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम

वैश्विक बाज़ार में भारतीय मुद्रा रुपए की हालत बहुत अच्छी नहीं है. लेकिन भारत की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का प्रचलन बढ़े.

भारत और मलेशिया ने डॉलर के बजाय अपनी मुद्राओं में व्यापार करने के फ़ैसला किया है.

मलेशिया के अलावा भारत के साथ रुपए में व्यापार करने के लिए अब तक कुल 18 देशों ने सहमति दी है.

मलेशिया दक्षिण पूर्व एशिया के सबसे अहम वित्तीय केंद्रों में से एक है.

अभी तक भारत और मलेशिया के बीच व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता था. लेकिन नए समझौते को कैसे अमली जामा पहनाया जाएगा?

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इंडिया इंटरनेशनल बैंक ऑफ़ मलेशिया की इसमें अहम भूमिका होगी.

ये बैंक क्वालालम्पुर में है और यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के साथ मिलकर काम करता है. इन्हीं दोनों बैंकों के मार्फ़त रुपये में लेन देन किए जाएंगे.

किसी देश के साथ व्यापार में उसकी स्थानीय मुद्रा में भुगतान के लिए एक विशेष बैंक खाता, 'वोस्त्रो', खोलना ज़रूरी होता है.

इस प्रक्रिया के तहत इंडिया इंटरनेशनल बैंक ऑफ़ मलेशिया ने यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया में वोस्त्रो खाता खोल दिया है. इसी तरह 18 देशों ने भी भारतीय बैंकों में वोस्त्रो खाते खोल लिए हैं.

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने मार्च में इससे संबंधित ज़रूरी अनुमति दे दी. जुलाई 2022 में ही रिज़र्व बैंक ने इस प्रक्रिया की मंज़ूरी दे दी थी.

इसके बाद फिजी, जर्मनी, गुयाना, इसराइल, मॉरिशस, म्यांमार, न्यूज़ीलैंड, ओमान, रूस, सेशेल, बोत्सवाना, श्रीलंका, तंज़ानिया, यूगांडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया ने वोस्त्रो खाते खोले.

आरबीआई का कहना है कि 'रुपी ट्रेड' को व्यापार और विकास में मदद के लिए लाया गया है.

रुपया
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रुपया

रुपी ट्रेड के मुख्य चार पहलू

मलेशियाई अर्थशास्त्री मासिलामानी का कहना है कि रुपी ट्रेड से दोनों पक्षों को फ़ायदा होगा. बीबीसी तमिल से बात करते हुए उन्होंने इसकी चार ख़ासियतों का ज़िक्र किया.

मासिलामानी कहते हैं, "पहला है, विनिमय दर. अगर डॉलर का इस्तेमाल करते हैं तो हमें भुगतान के समय कमिशन देना पड़ता है. दूसरा, व्यापार जगत में मुद्रा की क़ीमत में उतार चढ़ाव. तीसरा, व्यापार में वृद्धि और चौथा पहलू है, व्यापार संबंध और गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी."

उनके मुताबिक़, "इसीलिए रुपी ट्रेड हमें अपने आर्थिक चुनाव का विकल्प देता है. अगर इन चार पहलुओं को ध्यान में रखें तो दोनों देशों के व्यापारियों और उद्योगपतियों से लेकर सामान्य आदमी तक को इसका फ़ायदा मिलेगा."

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व्यापार
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व्यापार और बढ़ेगा

उनका कहना है कि लंबे समय से डॉलर को वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण मुद्रा के रूप में अहमियत दी जाती रही है. लेकिन अगर हम डॉलर इस्तेमाल करें तो कमिशन और अन्य ख़र्च बढ़ेंगे. अगर हम सीधे भारतीय रुपया इस्तेमाल करें तो ये ख़र्चे बच जाएंगे.

मान लीजिए अगर हमें मलेशियाई मुद्रा रिंगटिस में भुगतान करना है तो पहले हमें भारतीय रुपये को डॉलर में बदलना होगा, फिर डॉलर को रिंगटिस में बदलना पड़ेगा.

हमें दो बार कमिशन देना पड़ेगा. कुछ स्थितियों में, ये भारत या मलेशिया के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है, लेकिन हमेशा नहीं. मुद्रा की क़ीमत बदलती रहेगी. डॉलर में उतार चढ़ाव लगातार होता रहता है. इसलिए डॉलर में व्यापार करने वाले देशों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

वो कहते हैं, "चाहे भारतीय रुपया मज़बूत हो रहा हो या नहीं, इसकी साख़ बढ़ती जा रही है. रूस जैसे देश इसे स्वीकार कर रहे हैं. इसी तरह मलेशिया भी. मलेशियाई सरकार का ये अच्छा फैसला है."

उनके मुताबिक़, अगर व्यापार बढ़ता है तो ये व्यापारियों के लिए फ़ायदेमंद होगा. अगर भुगतान आसान हो जाता है तो स्वाभाविक है कि व्यापार बढ़ेगा और उसका विस्तार होगा.

वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि दोनों देशों के व्यापारियों के लिए ये उपयोगी साबित होगा."

मासीलामानी कहते हैं, "हाल ही में मलेशिया के प्रधानमंत्री चीन गए थे. उनके इस दौरे से व्यापारिक अवसर बनने में मदद मिली. मैं मानता हूं कि वो व्यापारिक रिश्ते मज़बूत करने और व्यापारिक अवसरों को बढ़ाने के लिए भारत का भी दौरा करेंगे."

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम
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मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम

फ़ैसले का स्वागत

मलेशिया में पेनांग के उपमुख्यमंत्री प्रोफ़ेसर रामासामी कहते हैं कि ये फ़ैसला स्वागतयोग्य है और ये वैश्विक बाज़ार में अमेरिकी डॉलर के दबदबे को कम करेगा.

बीबीसी तमिल से उन्होंने कहा कि मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम भारत और चीन दोनों से अच्छे रिश्ते बनाने की चाहत रखते हैं.

वो कहते हैं, "रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध ने पूरी दुनिया पर असर डाला है. इस हालत में भारत और मलेशिया की पहल से दोनों के बीच व्यापार बढ़ेगा. व्यापारियों को फ़ायदा पहुंचेगा."

वह मानते हैं कि मलेशियाई सरकार ने इसे महसूस किया और इसीलिए समझौते के लिए राज़ी हुई.

उनके अनुसार, हालांकि कुछ लोगों का विचार है कि इस समझौते से कुछ व्यापारियों पर असर पड़ेगा, लेकिन प्रधानमंत्री और सरकार ने ज़रूर इस बारे मे सोचा होगा.

मलेशियाई प्रधानमंत्री अच्छे विदेशी रिश्ते विकसित करना चाहते हैं, ऐसे में उम्मीद है कि नया व्यापारिक समझौता मलेशिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि सबके लिए फ़ायदेमंद होगा.

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मलेशिया और भारत के बीच कितना व्यापार?

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया का कहना है कि ये समझौता दोनों देशों को वस्तु एवं सेवाओं में एक पारदर्शी क़ीमत का मौक़ा मुहैया कराएगा.

बैंक ने कहा है कि उम्मीद है कि रुपी ट्रेड से विनिमय ख़र्चों में कमी आएगी और व्यापारियों को लाभ होगा.

साल 2021-22 में भारत-मलेशिया के बीच 19.4 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था. रुपी ट्रेड आने वाली मुश्किलों से उबरेगा और उम्मीद है कि तब कुल व्यापार में और बढ़ोतरी होगी.

आसियान देशों में मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है.

साल 2021-22 में सिंगापुर के साथ भारत का व्यापार 30.1 अरब डॉलर और इंडोनेशिया के साथ 26.1 अरब डॉलर था.

कहा जा रहा है कि इस साल के अंत तक भारत अपना कुल निर्यात दो ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाने के लिए ज़ोर लगा रहा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत डॉलर या यूरो पर बिना निर्भर हुए मलेशिया समेत अन्य देशों के साथ व्यापार को बढ़ावा दे रहा है.

भारत मलेशिया का 13वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है और मलेशिया भारत का 10वां सबसे बड़ा साझीदार है. भारत उसे खनिज, ईंधन, एल्युमीनियम, खाद्य मांस, स्टील, केमिकल, ब्यॉलर और इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान निर्यात करता है जबकि मलेशिया आर्गेनिक केमिकल और पाम तेल निर्यात करता है.

डॉलर
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क्या डॉलर को चुनौती दी जा रही है?

माना जाता है कि यूक्रेन युद्ध ने भारतीय व्यापार को प्रभावित किया है. इसलिए भारत सरकार इस असर से ख़ुद को बचाने के लिए तमाम उपाय कर रही है.

क्वालालम्पुर के पत्रकार के. देवेदिरन कहते हैं कि इन उपायों में से 'रुपी ट्रेड' एक तरीक़ा है.

उनके अनुसार, इस समझौते से भारत ग़ैर डॉलर व्यापार को बढ़ावा दे रहा है.

हालांकि वो कहते हैं, "इसे डॉलर को चुनौती देने के रूप में देखने की बजाय, हम इसे भारतीय रुपये की साख़ बढ़ाने के कदम के रूप में भी देख सकते हैं."

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