RSS, मोदी की आलोचना या तारीफ? दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी के लिए किया था ट्वीट? अब विवाद पर दी सफाई
Digvijaya Singh RSS BJP ROW: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर सियासी बहस के केंद्र में हैं। इस बार वजह बना उनका वह सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने आरएसएस (RSS) और भाजपा (BJP) की संगठनात्मक ताकत की तारीफ कर दी।
बयान सामने आते ही कांग्रेस के भीतर ही सवाल उठने लगे कि क्या दिग्विजय सिंह पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी को कोई संदेश देना चाहते थे। हालांकि दिग्विजय सिंह ने इस अटकल को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहां, ''मैं RSS और मोदी का सबसे बड़ा आलोचक हूं। लेकिन फिर भी मैं ये कहना चाहता हूं उनका संगठन कांग्रेस से मजबूत है।'' उन्होंने ये भी कहा कि उनका पोस्ट राहुल गांधी और पार्टी के हाईकमान को दिखाने के लिए नहीं था।

ऐसे में आइए जानते हैं कि दिग्विजय सिंह ने सफाई में और क्या-क्या कहा और पूरे विवाद की जड़ क्या है। ये भी जानेंगे कि बाकी अन्य कांग्रेस नेताओं ने दिग्विजय सिंह के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी है।
▶️ दिग्विजय सिंह का वो पोस्ट क्या था, जिसको लेकर हुआ विवाद?
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से ठीक पहले 27 दिसंबर 2025 दिग्विजय सिंह का एक पोस्ट सामने आया। इस पोस्ट में उन्होंने आरएसएस की संगठनात्मक क्षमता की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा की थी। दिग्विजय सिंह ने लिखा, ''Quora साइट पर मुझे ये तस्वीर मिली। ये बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस की जमीनी स्वयंसेवक और जनसंघ बीजेपी का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का सीएम और देश का पीएम बना। ये संगठन की शक्ति है। जय सिया राम।''
इस पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, जयराम रमेश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया था। दिग्विजय सिंह ने जिस तस्वीर को शेयर किया, वह वर्ष 1995 की है, जिसमें नरेंद्र मोदी जमीन पर बैठे नजर आते हैं, जबकि तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे दिखाई देते हैं।
इस तस्वीर के जरिए दिग्विजय सिंह ने परोक्ष रूप से यह संदेश देने की कोशिश की थी कि आरएसएस और भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर देती हैं और संगठन की यही मजबूती उन्हें शीर्ष तक पहुंचने का रास्ता देती है।

यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया। कांग्रेस के कई नेताओं को यह टिप्पणी असहज करने वाली लगी, क्योंकि दिग्विजय सिंह को हमेशा आरएसएस का कट्टर आलोचक माना जाता रहा है।
▶️ क्या राहुल गांधी को दिखाने के लिए दिग्विजय सिंह ने किया पोस्ट, अब खुद दी सफाई
इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि क्या वह यह बात राहुल गांधी या कांग्रेस नेतृत्व को इशारों में कहना चाहते थे, तो उन्होंने साफ कहा, "नहीं, बिल्कुल नहीं। जब मेरे पास राहुल गांधी से सीधे बात करने का विकल्प है, तो मैं सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए क्यों संदेश दूंगा?" उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब सीडब्ल्यूसी की बैठक कुछ ही देर में होने वाली थी, तो ऐसे समय पर किसी को संकेत देने का सवाल ही नहीं उठता।
▶️ 'RSS-मोदी का सबसे बड़ा आलोचक हूं'
दिग्विजय सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि विचारधारा के स्तर पर वह आज भी आरएसएस के उतने ही बड़े आलोचक हैं, जितने पहले थे। उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस को नाथूराम गोडसे की सोच से कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि उन्होंने पिछले 50 वर्षों में विधानसभा से लेकर संसद तक सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और आगे भी लड़ते रहेंगे। उनके मुताबिक, संगठन की मजबूती की तारीफ करना और विचारधारा को अपनाना, दोनों अलग बातें हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा,
''मैं RSS की आइडियोलॉजी और प्राइम मिस्टर नरेंद्र मोदी के काम करने के तरीके और उनकी पॉलिसीज का सबसे कड़ा क्रिटिक्स में से एक हूं। मैंने ऐसा करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। लेकिन जहां तक उनके ऑर्गनाइजेशन (संगठन) की बात है, इसमें कोई शक नहीं कि उनका संगठन हमसे (कांग्रेस) कहीं बेहतर है।''
लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि कांग्रेस को आरएसएस का अनुकरण करना चाहिए। कांग्रेस एक आंदोलन से निकली पार्टी है, जिसने आजादी की लड़ाई अहिंसा, सत्य और करुणा के रास्ते से लड़ी।
▶️ RSS को लेकर किए गए पोस्ट पर क्या बोले दिग्विजय सिंह?
अपने BJP-RSS वाले पोस्ट पर हो रहे विवाद पर दिग्विजय सिंह ने कहा,
''मुझे नहीं पता ये विवाद क्यों हो रहा है। क्योंकि यह एक बहुत ही रेयर फोटो है जो मुझे Quora पर मिली, जिसके बारे में मैंने कहा, यह इतनी शानदार फोटो है कि वह (नरेंद्र मोदी) जमीन पर लाल कृष्ण आडवाणी जी के पैरों में बैठे हैं और फिर वह भारत के चीफ मिनिस्टर और प्राइम मिनिस्टर बन जाते हैं। यही संगठन की ताकत है, वरना नरेंद्र मोदी क्या थे?''
▶️ 'राहुल गांधी को मनाना आसान नहीं, लेकिन...'
जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि उन्होंने एक पोस्ट में क्यों लिखा कि राहुल गांधी को मनाना आसान नहीं है, तो दिग्विजय सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा कि किसी भी प्रतिबद्ध व्यक्ति को मनाना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि एक बार राहुल गांधी कोई फैसला कर लेते हैं, तो फिर उससे पीछे नहीं हटते। यही बात उन्हें उम्मीद से भर देती है।
दिग्विजय सिंह लंबे समय से कांग्रेस में सत्ता के विकेंद्रीकरण की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की पहचान ही विकेंद्रीकरण रही है।
उन्होंने राहुल गांधी की 'संगठन सृजन' पहल की तारीफ करते हुए कहा कि जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति एक बड़ा कदम है। अब जरूरत है कि यह प्रक्रिया बूथ स्तर तक पहुंचे। उनके मुताबिक, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने इस पर भरोसा दिलाया है और उन्हें उम्मीद है कि यह तय समय में पूरा होगा।

▶️ क्या संकेत दे रहे हैं दिग्विजय सिंह?
दिग्विजय सिंह बार-बार यही दोहरा रहे हैं कि उनके बयान को गलत संदर्भ में न देखा जाए। उनके मुताबिक, यह पोस्ट आरएसएस की विचारधारा के समर्थन में नहीं, बल्कि संगठनात्मक ढांचे की एक टिप्पणी भर थी।
लेकिन सियासत में शब्दों का वजन भारी होता है। ऐसे में उनके बयान ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, रणनीति और संगठन को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर सतह पर ला दिया है।
▶️ दिग्विजय सिंह के बयान पर क्या कहना है कांग्रेस नेताओं का?
दिग्विजय सिंह के बयान ने कांग्रेस के अंदर भी मतभेद उजागर कर दिए हैं। एक तरफ पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत जैसे नेता आरएसएस से किसी भी तरह की सीख को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांधी की हत्या से जुड़े संगठन से कांग्रेस क्या सीखेगी।
दूसरी ओर शशि थरूर और टीएस सिंह देव जैसे नेता संगठनात्मक अनुशासन और कार्यशैली पर चर्चा को गलत नहीं मानते। शशि थरूर ने कहा कि किसी भी पार्टी के लिए अनुशासन जरूरी है और कांग्रेस को भी अपने संगठन को मजबूत बनाना चाहिए।
🔹 तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए संगठन में अनुशासन बेहद जरूरी होता है। थरूर ने कहा, ''हमारी पार्टी का 140 साल का लंबा इतिहास है और हम अपने अतीत से बहुत कुछ सीख सकते हैं। मैं भी चाहता हूं कि हमारा संगठन और ज्यादा मजबूत और अनुशासित बने।''
🔹 वहीं कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा, ''आरएसएस से सीखने जैसा कुछ भी नहीं है। गोडसे के लिए जानी जाने वाली संस्था गांधी द्वारा स्थापित संगठन को क्या सिखा सकती है।'' खेड़ा का इशारा नाथूराम गोडसे की ओर था, जिसे महात्मा गांधी की हत्या का दोषी माना जाता है और जिसका आरएसएस से कथित संबंध रहा है।
🔹 कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह के बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''हमें आरएसएस से कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है। हमने ब्रिटिश राज और उसके अन्याय के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम लड़ा और उसे जन आंदोलन में बदला। इसलिए हमें किसी से सीखने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि लोगों को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से सीखना चाहिए।''
श्रीनेत ने कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने देश के हर वर्ग को जोड़कर अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया है, ऐसे में आरएसएस जैसी संस्था से सीखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
🔹 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव ने दिग्विजय सिंह का बचाव करते हुए कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''जहां तक मुझे जानकारी है, दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे आरएसएस की विचारधारा को पूरी तरह खारिज करते हैं। वे उससे सहमत नहीं हैं, इसलिए उनके बयान को आरएसएस के समर्थन के तौर पर देखना ठीक नहीं है। विचारधारा एक अलग चीज है और काम करने का तरीका दूसरी।''
अपने तर्क को और स्पष्ट करते हुए टीएस सिंह देव ने उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ''आप कई संगठनों को देख सकते हैं और उनसे काम करने के तरीके सीख सकते हैं, बिना उनकी विचारधारा अपनाए। अगर ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच क्रिकेट मैच हो और हम देखें कि दूसरी टीम किस तरह खेल रही है और हमें अपने खेल में सुधार की जरूरत लगे, तो क्या हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। पहले उनके फास्ट बॉलर ज्यादा प्रभावी होते थे, आज हमारे पास भी शानदार फास्ट बॉलरों की पूरी श्रृंखला है। इसका मतलब यह नहीं कि हम उनकी सोच अपना रहे हैं। सीख किसी से भी ली जा सकती है।''
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