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धड़क: ‘आज भी डर है कि कहीं हमारे परिवार वाले हमें मार न दे’

धड़क: ‘आज भी डर है कि कहीं हमारे परिवार वाले हमें मार न दे’

"मेरी पत्नी का परिवार काफ़ी प्रभावशाली है इसलिए हम डरते हैं कि कहीं वे हमें ढूंढ ना लें और वैसा न करें जैसा 'सैराट' में हुआ था. अनिश्चितताओं के बादल ने हमें घेर रखा है."

गगन लड़खड़ाती आवाज़ में अपना यह दर्द बयां करते हैं. गगन और प्रीति अपना असली नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि वे नहीं चाहते कि उनकी असलियत सामने आए और वे शादी के बाद से छिपे हुए हैं.

वे लगातार अपने परिवार के डर के साए में जी रहे हैं.

मराठी फ़िल्म सैराट के रीमेक 'धड़क' के रिलीज़ होने पर उन्होंने अपनी कहानी बीबीसी को बताई. उनका मानना है कि इस फ़िल्म की कहानी और उनकी कहानी मिलती-जुलती है.

महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के एक गांव में पाटिल और पटोले परिवार पड़ोसी हैं. कुछ साल पहले गगन पटोले की प्रीति पाटिल से निगाहें मिलीं. इसके बाद वे एक-दूसरे को देखने लगे और फिर यह मुस्कुराहट में बदल गया. आख़िरकार दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे. दोनों ने शादी करने का फ़ैसला किया लेकिन उनके भाग्य में कुछ और था.

प्रीति अपने जीवन के उन डरावने दिनों के बारे में कहती हैं, "जब मेरे परिजनों ने मेरे लिए लड़का ढूंढना शुरू किया तो मैंने उन्हें इसके बारे में बताने के लिए तय किया. लेकिन न जाने कैसे गांव के किसी शख़्स ने मेरे पिता को हमारे संबंधों के बारे में बता दिया. इसने मेरे पिता को ग़ुस्से में डाल दिया. वह मुझसे इतना नाराज़ थे कि उन्होंने गांव के बाहर अपनी फ़ैक्ट्री में मुझे बंद कर दिया."

वह बताती हैं, "मेरे परिजन मुझसे पूछते थे कि मैं क्या चाहती हूं. जब मैं उनसे कहती थी कि मैं गगन से प्यार करती हूं और उसके साथ ज़िंदगी बिताना चाहती हूं तो वह ग़ुस्से में आ जाते. उन्होंने साफ़ कर दिया कि यह असंभव है और अगर मैं इस पर ज़ोर देती हूं तो वे मुझे मार देंगे. मैं उनकी बेटी थी तो इसलिए उन्होंने मुझे चेतावनी दी. उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि वे मेरे लिए अच्छा लड़का ढूंढेंगे."

जब दोनों को किया गया जुदा

कुछ दिनों के बाद प्रीति को उनके मामा के घर भेज दिया गया. उसके बाद उन्हें उनकी मौसी के यहां पुणे भेज दिया गया जहां उनसे उनका फ़ोन छीन लिया गया.

प्रीति उन दिनों को याद करते हुए कहती हैं, "वहां मुझे उनके एक रिश्तेदार से बात करने के लिए कहा जाता. वह लड़का पुणे में ही नौकरी करता था और वह उससे मेरी शादी कराना चाहते थे. वे उसे बुलाते थे और मेरी इच्छा के ख़िलाफ़ उससे बात करने को कहते थे."

प्रीति की आवाज़ में एक डर है, वह कहती हैं, "मैं जब अपने मामा के घर गई तो मेरी नानी ने मुझे थप्पड़ मारा. उन्होंने मुझे धमकी देते हुए कहा कि अगर मैं गगन का नाम लेती हूं तो वे मुझे ज़हर दे देंगे."

प्रीति जब इन परिस्थितियों से गुज़र रही थीं तब गगन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. उन्होंने प्रीति से कई बार संपर्क करने की कोशिश की. उन्हें जब कोई संपर्क नहीं मिला तो वह घबरा गए.

प्यार की खोज में निकले गगन

आख़िरकार गगन को प्रीति के ठिकाने के बारे में पता चल गया. प्रीति की एक दोस्त ने गगन को बताया कि प्रीति मुंबई में अपनी मौसी के घर पर हैं.

गगन उन दिनों के बारे में बताते हैं, "उसने मुझे बताया कि प्रीति मुंबई में अपनी मौसी के यहां है. उसको एक अच्छा लड़का मिल गया है और वह ख़ुश है. उसकी दोस्त ने मुझसे कहा कि उनकी शादी तय हो गई है. किसी भी तरह से मैंने इस पर भरोसा नहीं किया लेकिन मैं तब टूट गया था. मैं मुंबई गया और उसकी मौसे के घर पर आठ दिन तक नज़र रखी लेकिन मुझे ऐसा कुछ नहीं दिखा. वह आठ दिन तक बाहर नहीं निकली."

बाद में उन्हें पता चला कि प्रीति मुंबई में नहीं है. उन्हें एहसास हुआ कि उस लड़की ने उन्हें ग़लत बताया था. आख़िरकार उन्हें पता चल गया कि यह एक चाल थी.

गगन ने कहा, "कुछ दिनों के बाद प्रीति ने मुझे फ़ोन किया. उन्होंने कहा कि उनके परिजन उन पर एक दूसरे शख़्स के साथ शादी करने का दबाव डाल रहे हैं. उसने मुझे अपना पुणे का पता भी दिया. उस फ़ोन कॉल के बाद हमने भागने का फ़ैसला ले लिया था. हमने एक निडर योजना बनाई."



और आख़िरकार मुलाक़ात हुई

गगन अपनी शादी के बारे में बताते हैं, "10-12 दिनों के बाद मैं और मेरे दो दोस्त गाड़ी चलाकर पुणे पहुंचे. प्रीति पहले ही मुझे अपना पता दे चुकी थी. प्रीति ने घर पर नाटक किया कि वह क़रीबी दुकान पर घर का सामान लेने जा रही है. हमने अपनी कार उसकी मौसी के घर से 400 से 500 मीटर की दूर पर खड़ी की. प्रीति आकर कार में बैठ गई और हम शहर से बाहर चले गए. हम दूसरे क़रीबी शहर में गए और एक संगठन की मदद से शादी कर ली."

प्रीति कहती हैं, "मैं मराठा समुदाय से संबंध रखती हूं और गगन एक दलित परिवार से है. इस वजह से मेरे परिजनों ने हमारी शादी का विरोध किया. मेरे परिजन गगन की मां की हत्या करने की योजना तक पहुंच गए थे. उनकी योजना किसी और शख़्स से मेरी शादी कराने और गगन की हत्या करने की थी. तब हमने फ़ैसला किया कि अगर हम मर भी जाएं तो मैं किसी दूसरे शख़्स से शादी नहीं करूंगी."

सैराट पर क्या कहते हैं दोनों

गगन ने बीबीसी से कहा, "जब हमने सैराट देखी तो डर हमारे दिमाग़ में बैठ गया. फ़िल्म तब रिलीज़ हुई थी जब हम शादी के बारे में सोच रहे थे लेकिन मरने के लिए कौन शादी करता है? हम हमेशा साथ रहना चाहते थे. क्या हमारे परिजन हमारी हत्या करेंगे, यह डर अभी भी बना हुआ है."

लेकिन गगन कहते हैं कि सैराट आपको अंतर-जातीय विवाह के बारे में जागरूक करती है लेकिन प्रीति इस फ़िल्म को देखकर डर गईं.

प्रीति अभी भी डरी हुई हैं और कहती हैं, "डर अभी भी बना हुआ है. हम कह नहीं सकते कि कल या आज क्या हो सकता है. हमारे समाज में जातिगत भेदभाव बहुत गहराई तक घुसा हुआ है. परिजनों को अपनी बेटियों के पीछे मज़बूती से खड़ा होना चाहिए लेकिन एक दूसरी जाति से लड़के के आने के कारण वे ऐसा नहीं कर पाते हैं."



ऐसी और फ़िल्में बननी चाहिए

गगन धड़क फ़िल्म के बारे में जानते हैं. वह कहते हैं, "हां, मैंने धड़क के बारे में सुना है. वह सैराट फ़िल्म की रीमेक है. मुझे लगता है कि ऐसी बहुत सी फ़िल्में बननी चाहिए."

प्रीति ने भी इस फ़िल्म के बारे में सुना है लेकिन उन्होंने इसका ट्रेलर नहीं देखा है.

आज गगन और प्रीति महाराष्ट्र के कई बड़े शहरों में रह चुके हैं. उनके परिजन उन्हें आज भी खोज रहे हैं इसलिए वे हर महीने शहर बदलते रहते हैं. उनका भाग्य अभी भी अनिश्चित है.

(विवाहित जोड़े की सुरक्षा की दृष्टि से हमने लोगों और शहरों के नामों में बदलाव किया है.)

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