देशभर में आज मनाई जा रही बकरीद, सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करते हुए जामा मस्जिद में अदा की गई नमाज

नई दिल्‍ली। देशभर में आज बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है। दिल्ली स्थित जामा मस्जिद में लोगों ने शनिवार सुबह बकरीद की नमाज अदा की। इस दौरान लोगों ने मास्‍क लगाया हुआ था और सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन किया। आपको बता दें कि बकरीद मुसलमानों का ईद के बाद दूसरा सबसे बड़ा त्‍योहार है। इस मौके पर समुदाय के लोग ईदगाह जाकर या मस्जिदों में विशेष नमाज अदा करते हैं। इस बार कोरोना संकट ने इसकी चमक थोड़ी फीकी कर दी है।

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     देशभर में आज मनाई जा रही बकरीद, सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करते हुए जामा मस्जिद में अदा की गई नमाज

    बकरीद मनाने को लेकर यूपी सरकार की गाइडलाइन

    देश में शनिवार यानी कि आज से अनलॉक-3 की शुरुआत हो जाएगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अनलॉक-3 और बकरीद दोनों के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। बकरीद को लेकर सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देश के मुताबिक, मस्जिद में सामूहिक नमाज पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा खुले में जानवरों की कुर्बानी करने और खुले में मांस ले जाने की इजाजत नहीं होगी। सांप्रदायिक भावनाओं का ध्यान रखने और लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    क्या है बकरीद का इतिहास

    इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे हजरत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा की राह में कुर्बान किया था। ऐसा माना जाता है कि खुदा ने उनके जज्बे को देखकर उनके बेटे को जीवनदान दिया था। हजरत इब्राहिम को 90 वर्ष की आयु में एक बेटा हुआ जिसका नाम उन्होंने इस्माइल रखा। एक दिन अल्लाह ने हजरत इब्राहिम को अपने प्रिय चीजों को कुर्बान करने का आदेश सुनाया।

    इसके बाद एक दिन दोबारा हजरत इब्राहिम के सपने में अल्लाह ने उनसे अपने सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने को कहा तब इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए। हजरत इब्राहिम को लग रहा था कि कुर्बनी देते वक्त उनकी भावनाएं उनकी राह में आ सकती हैं। इसलिए उन्होंने अपनी आंख पर पट्टी बांध कर कुर्बानी दी। उन्होंने जब अपनी आंखों से पट्टी हटाई तो उन्हें अपना बेटा जीवित नजर आया। वहीं कटा हुआ दुम्बा (सउदी में पाया जाने वाला भेड़ जैसा जानवर) पड़ा था। इसी वजह से बकरीद पर कुर्बानी देने की प्रथा की शुरुआत हुई। बकरीद को हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इसके बाद इस दिन जानवरों की कुर्बानी दी जाने लगी।

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