OPINION: LG और CM की तकरार के बावजूद AAP सरकार ने दिल्ली को विकास के आयामों पर किया स्थापित
OPINION: दिल्ली में भी अन्य राज्यों की तरह एक चुनी हुई सरकार है। जबकि राष्ट्रीय राजधानी होने की वजह से दिल्ली सरकार को उतनी शक्तियां नहीं है जितनी की अन्य राज्य सरकारों के हिस्से में है। आए दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और मुख्य सचिव के बीच तकरार देखने को मिलता है।
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि गवर्नर को चुनी हुई सरकार की सलाह के हिसाब से काम करने की जरूरत नहीं है। दिल्ली सरकार ने एल्डरमैन की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। इसके बाद से दिल्ली सरकार के सामने और मुश्किलें खड़ी हो गई। दिल्ली में यमुना नदी की सफाई की बात हो या फिर डीटीसी बस में मार्शलों की नियुक्ति का मुद्दा ऐसे तमाम उदाहरण हैं जब एलजी और दिल्ली सरकार आमने-सामने आए।

AAP की तरफ से आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से फिर सफाई दी जाती है। वहीं, इस मामले में दिल्ली विधानसभा में प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रही बीजेपी का भी अपना पक्ष है। सत्तापक्ष और विपक्ष के दावों में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि कोई नहीं कर सकता। सवाल है कि क्या सच में ऐसा कुछ है, जो आरोप आप सरकार की ओर से लगाए जाते हैं? AAP नेताओं ने एलजी पर योगशाला, मोहल्ला क्लीनिक की दवाइयां रोकने, डॉक्टरों का वेतन, दिल्ली की दिवाली, रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ, केजरीवाल का प्रस्तावित सिंगापुर दौरा, शिक्षकों की विदेश में ट्रेनिंग समेत कई अन्य योजनाओं को रोकने का आरोप लगाया। लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
एक और विवाद तब सामने आया जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सिंगापुर जाना था। विवादों के बीच केजरीवाल सिंगापुर नहीं गए। तब दिल्ली सरकार ने बयान जारी कर कहा था कि मुख्यमंत्री की यात्रा की अनुमति संबंधी फाइल एलजी को सात जून को ही भेज दी गई थी। उपराज्यपाल डेढ़ महीने तक चुप बैठे रहे और 21 जुलाई को फाइल वापस लौटा दी।
दिल्ली सरकार द्वारा किए गए काम की बात करें, तो शिक्षा और स्वास्थ्य Model ने देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में सुर्खियां बटोरने का काम किया। फ्री बस, मुफ्त बिजली और पानी जैसे योजनाओं के बदौलत दिल्ली सरकार ने देश को Governance का Model प्रस्तुत किया। देश के बड़े राजनीतिज्ञ से लेकर नीति निर्माताओं के बीच एक चर्चा को जन्म दिया।
अब देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली के सियासी लड़ाई में जनता AAP सरकार द्वारा किए गए कामों को अमल में लाती है या नहीं? सवाल यह भी है कि क्या एलजी और सरकारी अधिकारियों की वजह से राज्य सरकार की कामों में आ रहीं रुकावटें आईं या यह सिर्फ एक राजनीतिक आरोप है?












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